निचलौल (महराजगंज), 07 जुलाई।
ग्राम सभा पिपरा काजी, विकास खंड निचलौल में हुए कथित मनरेगा घोटाले की जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता श्रीनिवास और मनोज कुमार गौतम ने जिलाधिकारी को पुनः पत्र देकर आरोप लगाया है कि खंड विकास अधिकारी द्वारा की गई जांच केवल औपचारिकता मात्र थी।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें जांच प्रक्रिया की कोई सूचना नहीं दी गई, न ही मौके पर बुलाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जांच ग्राम सचिव, जेई, प्रधान और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से लीपापोती कर मामले को दबाने का प्रयास है।
पूर्व में दर्ज शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी द्वारा विकास खंड अधिकारी को जांच सौंपी गई थी, लेकिन जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी महाराजगंज से मांग की है कि जिलास्तरीय स्वतंत्र जांच समिति का गठन कर निष्पक्षता से मामले की जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
ग्राम सभा पिपरा काजी में मनरेगा योजना के अंतर्गत हुए कथित वित्तीय घोटाले की जांच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट शिकायतकर्ता श्रीनिवास और मनोज कुमार गौतम ने एक बार फिर जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है।
उनका आरोप है कि खंड विकास अधिकारी ने जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति की। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्हें जांच स्थल पर बुलाया ही नहीं गया और बिना उनकी जानकारी के जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, जेई और अन्य घोटालेबाजों को बचाने का प्रयास हो रहा है।
शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी से अपील की है कि मामले की निष्पक्षता के लिए जिले स्तर की उच्च स्तरीय टीम बनाकर दोबारा जांच कराई जाए, ताकि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का पर्दाफाश हो सके और दोषियों को सजा मिले।
रवि प्रताप सिंह (ब्यूरो चीफ महाराजगंज)