प्रीतम यादव:—
पांडातराई धार्मिक ग्रंथ गुरु को भगवान से बड़ा बताते हैं गुरु की महिमा ईश्वर से बड़ी है और यह पौराणिक कथाओं से ही नहीं बल्कि वर्तमान परिवेश के माध्यम से सिद्ध हो चुका है गुरु पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले शिष्य भी मौजूद है गुरु पूर्णिमा शिष्यों के लिए विशेष पर्व होता है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्यों ने अपने गुरु स्थान पर जाकर गुरुदेव भगवान को प्रणाम करते हुए उनका आशीर्वाद लिया सच्चे रास्ते पर चलने का संदेश देने वाला ही सच्चा गुरु होता है ।कहा जाता है कि गुरु सिर्फ ज्ञान ही नहीं बल्कि ईश्वर से जोड़ने का माध्यम भी है नगर के प्राचीन राम मंदिर पर विराजित सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी प्रवक्ता अनंत श्री विभूषित पीठाधीश्वर परम पूज्य आचार्य श्री जलेश्वर महाराज के शिष्य ने चरण पादुका का पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया और वही प्रवचन के माध्यम से आचार्य श्री जलेश्वर महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का दिन परम कल्याणकारी होता है यह शुभ दिन गुरु की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है जो ज्ञान और आत्मज्ञान के मार्ग पर व्यक्तियों का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है मानव जीवन में भी भारी कठिनाईयां परेशानी आती है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला ही सद्गुरु होता है “” गुरु बिन ज्ञान न उपजै गुरु बिन मिलै न मोष ! गुरु बिन लखै न सत्य को गुरु बिन मिटै न दोष !!”” जब हमारे जीवन में कुछ भी दिखाई नहीं देता तब गुरु ही हमारे राहों को सरल बनाते हैं इस गुरु पूर्णिमा के मौके पर शिष्य मंडल द्वारा कलश यात्रा निकाली गई जिसमें महिलाएं सिर पर कलश लेकर चलती रही धार्मिक उत्साह और भक्ति का प्रतीक है इस यात्रा में लोग भजन कीर्तन करते हुए जयकारे लगाते हुए और नाचते गाते रंग गुलाल फटाखे से आतिशबाजी करते हुए सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए फिर महाआरती कर भंडारा प्रसाद लिए।