विश्वविद्यालय, शिक्षा केंद्र के साथ भारतीय संस्कृति, प्रकृति एवं परंपरा का संवाहक- कुलगुरू
संवादाता विकाश विश्वकर्मा शहडोल
पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया दीक्षारंभ कार्यक्रम
पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल में नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं के स्वागत हेतु दीक्षारंभ समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दीक्षारंभ समारोह में नव प्रवेषित छात्र-छात्राओ को फूलमाला एवं तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
दीक्षारंभ कार्यक्रम को सम्बोंधित करते हुए कुलगुरू प्रो. रामशंकर ने कहा कि “विश्वविद्यालय शिक्षा का केवल केंद्र नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, प्रकृति एवं परंपरा का संवाहक है। विद्यार्थियों को न केवल डिग्री प्राप्त करनी है, बल्कि अपने हस्ताक्षर से समाज में एक सकारात्मक पहचान बनानी है।
उन्होंने “हस्ताक्षर” की महत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि हस्ताक्षर केवल पहचान का साधन नहीं, अपितु उत्तरदायित्व, संकल्प और व्यक्तित्व की छवि है। जब कोई छात्र अपने विचार, आचरण एवं कर्तव्यों पर हस्ताक्षर करता है, वह राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नवप्रवेशित छात्रों को पवित्र रक्षा सूत्र बांधा गया, जो गुरु-शिष्य परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और कर्तव्यबोध का प्रतीक बनकर उपस्थित रहा।
कार्यक्रम को प्रोफेसर डॉ. मनीषा शुक्ला ने सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर नवाचार, अनुसंधान एवं मूल्यों पर आधारित शिक्षा की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, सत्यनिष्ठा एवं आत्मविश्वास के साथ शिक्षा के पथ पर अग्रसर होने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में प्रो. प्रमोद पाण्डेय, डॉ. बृजेंद्र पाण्डेय ने भी अपने विचार साझा किये। इस अवसर पर प्रो. गीता सराफ, डॉ. चेतना सिंह, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. गंगाधर ढोके, डॉ. प्रवीण शर्मा सहित विश्वविद्यालय के सभी विभागों के प्राध्यापकगण, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।