खबर सहारनपुर से
सहारनपुर स्थित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला ने इस रक्षाबंधन को आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए गोबर से बनी जैविक राखियों की एक अनूठी पहल शुरू की है। ये राखियां शुद्ध देशी गाय के गोबर से निर्मित हैं, जिनमें तुलसी के बीज डाले गए हैं। राखी के उपयोग के बाद इसे मिट्टी या गमले में लगाने से तुलसी का पौधा उगता है, जिससे यह राखी धार्मिक, पारिस्थितिक और व्यावहारिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी बन जाती है।
यह इको-फ्रेंडली राखी ₹10 में उपलब्ध है, जबकि बाजार में आम राखियों की कीमत ₹100 से ₹250 तक होती है। अब तक 1000 राखियां तैयार हो चुकी हैं, और लक्ष्य 1500-2000 राखियों का है। बिक्री ऑनलाइन व ऑफलाइन स्टॉल्स के माध्यम से की जा रही है।
नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में 586 निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा के अनुसार, यह पहल गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और पिछले वर्ष मिले उत्साहजनक प्रतिसाद के चलते इस बार बड़े पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़