गुना से गिरवर साहू की रिपोर्ट
नगर पालिका गुना में फर्जी आदेश कांड का पर्दाफाश
बैठक में कर्मचारियों ने मानी गलती, नपा अध्यक्ष ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश
गुना नगर पालिका परिषद गुना में बड़ा मामला सामने आया है। परिषद के कुछ कर्मचारियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित आदेश जारी कर दिया। जब यह मामला उजागर हुआ तो 28 अगस्त को नगर पालिका सभा कक्ष में आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में अध्यक्ष सविता गुप्ता, परियोजना अधिकारी संजय श्रीवास्तव और सीएमओ मंजूषा खत्री सहित निकाय के सभी अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान पूरे प्रकरण की जांच की गई और कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया। पूछताछ में संबंधित कर्मचारियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।
बैठक में खुलासा हुआ कि कार्यालयीन आदेश क्रमांक 2485/2025, दिनांक 26 अगस्त को बिना सीएमओ के संज्ञान और अनुमति के जारी किया गया था। इस आदेश में सीएमओ के कूटरचित हस्ताक्षर कर दस्तावेज बाहर भेज दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिषद ने तत्काल जांच शुरू की।
पूछताछ में सामने आया कि स्थापना लिपिक अनिल धौलपुरिया और स्थापना भृत्य चंद्रेश सोनी ने उक्त पत्र टाइप किया। प्रभारी मेट महाराज सिंह और अस्थायी कर्मचारी करण मालवीय ने पत्र को जावक करने की बात स्वीकार की। वहीं अस्थायी कर्मचारी अमन सोनी ने दस्तावेज पर सीएमओ के कूटरचित हस्ताक्षर करना स्वीकार किया। कर्मचारियों ने यह भी खुलासा किया कि इस फर्जी आदेश को तैयार करने में महाराज सिंह ने देव कुमार झावा का नाम भी लिया। सीएमओ मंजूषा खत्री ने बैठक में कहा कि मैंने हमेशा नए कर्मचारियों को आगे बढ़ाने और उन्हें जिम्मेदारी सौंपने की कोशिश की, लेकिन आज यह देखकर दुख होता है कि उन्हीं कर्मचारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। उन्होंने इसे गंभीर विश्वासघात बताया।
नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की हरकत से परिषद की छवि धूमिल हुई है। ऐसे कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अस्थायी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक करने और नियमित कर्मचारियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया। परियोजना अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने कहा कि मैंने अपनी नौकरी की शुरुआत इसी परिषद से की थी और न कभी मेरे अधीनस्थों ने और न ही मैंने ऐसी गतिविधि की। इस प्रकार का कार्य बेहद शर्मनाक है। दोषियों को कठोर दंड मिले ताकि भविष्य में कोई अन्य कर्मचारी इस तरह का दुस्साहस न करे। बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने हाथ उठाकर यह संकल्प लिया कि भविष्य में ऐसे मामलों में दोषियों को कर्मचारी संगठन से किसी तरह का सहयोग नहीं मिलेगा। परिषद के सभी कर्मचारी पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी से कार्य करेंगे।
बैठक के अंत में यह निर्णय हुआ कि दोषी अस्थायी कर्मचारियों को तत्काल सेवा से हटाया जाए और नियमित कर्मचारियों पर निलंबन की कार्यवाही कर विभागीय जांच प्रस्तावित की जाए। इस कार्रवाई से साफ संदेश दिया गया है कि नगर पालिका में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के लिए कोई जगह नहीं है।