मां नर्मदा के अनमोल मोती ब्रहालीन संत सियाराम बाबा की मार्बल मूर्ति हुयी तैयार
1 दिसंबर को पुण्यतिथि पर होगी प्रतिमा स्थापित, आश्रम में तैयारियां जोरो पर
लोकेशन खरगोन जिला ग्राम तेली
भटयाण
खरगोन जिले के ग्राम तेली भट्याण बुर्जुग में नर्मदा तट के महान बहालीन संत सियाराम बाबा की पुण्यतिथि 1 दिसंबर को आश्रम परिसर में बावा की 5 फीट उंची प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। ब्रहालीन संत सियाराम बाबा का भव्य मंदिर भी नर्मदा तट पर आकार ले रहा है। जयपुर के मूर्तिकारों ने मूर्ति को तराशा है। संतश्री की मूर्ति के साथ दोनों शेर भी स्थापित होगे। मूर्तिकार विनोद कुमार शर्मा ने लगभग तीन माह में मूर्ति को सुंदर रूप दिया है।
10 से अधिक कलाकारों ने लगातार मार्बल पत्थर को त्तराश कर मूर्ति बनाई है। करीब सवा 5 फीट की प्रतिमा पर दो शेर बनाने में 8 लाख 50 हजार रूपए का खर्च आया है। मूर्ति स्थापना के लिए जयपुर में ही लाल पत्थरों से 8 बाय 8 का मंदिर भी बनाया गया है। संभामंडप की तैयारी होते ही यहां मंदिर को फीट किया जाएगा।
निमाड़ की आध्यात्मिक पहचान ‘संत सियाराम बाबा’
कोई यह नहीं जानता कि बाबा आए कहां से और कैसे और क्यों इस गांव में कैसे आए। कुछ 60-70 वर्ष पहले इस गांव में बाबा आए और तैली भट्यांण में ही बाया ने अपना आश्रम बना लिया था। बाबा ने कुटिया बलाई, हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की और सुबह-शाम राम नाम का जप और रामचरितमानस का पाठ करते रहते थे बाबा। कहते हैं बाबा का जन्म सुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ, कक्षा 7-8 तक पढ़ाई की, फिर एक गुजराती साहूकार के यहां मुनीम का कार्य करने लगे थे। उसी काम के दौरान एक संन्यासी के वर्शन बाबा को हुए, मन में वैराग्य जागा, राम काज का भाव जागृत हुआ और वे हिमालय पर साधना के लिए चले गए थे। यह भी कोई नहीं जानता कि सियाराम बाबा के गुरु कौन है? कितने वर्ष हिमालय में साधना की थी? यहां तक कि, बाबा के नाम के पीछे की कहानी भी बड़ी मजेदार है। कहते हैं कि बाबा ने 12 वर्षों तक मौन धारण करके रखा हुआ था। वहीं, जब 12 वर्ष बाद उन्होंने अपना मुख खोला था, तो उनके मुख से पहला शब्य निकला ‘सियाराम’। इस वजह से गांव के लोगों ने उनका नाम सियाराम रख दिया था और अब सियाराम बाह्या के नाम से ही पूरे क्षेत्र में ये जाना जाता है सदावत में बाबा बाल, चावल, तेल, नमक, मिर्च, कपूर, अगरबत्ती व बत्ती भी देते थे। जो भी भक्त आश्रम आता है, बाबा अपने हाथों से चाय बनाकर पिलाते थे।
मध्यप्रदेश सरकार ने आवाजो को मुआवजे के 2 करोड़ 51 लाख दिए थे, दानी बाबा सियाराम ने मुआवजे की पूरी राशि खरगोन के समीप ही ग्राम नांगलवाड़ी में नाग देवता के मंदिर में दान कर दी थी ताकि वहां भव्य मंदिर बन सके और भक्तों को सुविधा मिले। यहां तक कि श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण में भी बाबा ने ढाई लाख रुपए दान किए थे। बाबा के आश्रम का नियम है कि वहां केवल 10 रुपए ही दान में स्वीकार किए जाते हैं और दानदाता का नाम रजिस्टर में बाबा दर्ज करते हैं। उन पैसों से नर्मदा परिक्रमावासियों का खाना और रहने की व्यवस्था वर्षों से आश्रम में होती आ रही है। वैसे तो निमाड़ की रत्नगर्भा धरती पर संत सियाराम बाबा का होना ही चमत्कार था और हमेशा युगों तक रहेगा!
INDIN TV NEWS खरगोन जिला से राजा गोखले ब्यूरो चीफ की खास रिपोर्ट