अवनीश आर्य सहारनपुर: आर्य वीर दल के प्रदेश संयोजक आचार्य पंकज आर्य ने भारत देश को पुन: आर्यावर्त बनाने का सन्देश दिया। कहा कि आर्य समाज कोई संप्रदाय पांच वर्ग नहीं बल्कि एक आंदोलन एक क्रांति एक आंदोलन और एक दिशा है आर्य समाज भारत कोई ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को संगठित करके एक परिवार बनाना चाहता है आर्य समाज के दरवाजे सभी मनुष्यों के लिए खुले हैं जिससे कोई भी मनुष्य आर्य समाज का अंग बन सकता है। बिजनौर से आमंत्रित प्रख्यात भजनोपदेशक मोहित शास्त्री, ऋषिपाल आर्य ओलरा, मदन आर्य, अंशुल आर्य, संगीता आर्या, वेदिका आर्या आदि ने भी संगीतमय प्रेरक भजन प्रस्तुत किए। पूर्व विधायक संजय गर्ग ने महर्षि दयानंद को निराला नेतृत्वकर्ता बताते हुए आर्य समाज से जुड़ने का आह्वान किया।
प्रभावी संचालन रणवीर शास्त्री ने किया। कार्यक्रम संयोजक अनिल आर्य, जिला मंत्री अवनीश आर्य, कोषाध्यक्ष राजकिशोर आर्य, जिला मीडिया प्रभारी व तहसील नकुड मंत्री डॉ.वीरसिंह भावुक, राजेश आर्य, जगपाल आर्य, नाथीराम आर्य, पूर्व जिलाध्यक्ष अनुराग आर्य, जयपाल आर्य, मांगेराम आर्य, देवेन्द्र आर्य, अभय सैनी, राजवीर आर्य, डॉ. प्रीतमसिंह नागियान, विपिन आर्य, विपिन मलिक. विजयपाल आर्य, सन्यासी सुतीक्ष आदि शामिल रहे
महर्षि दयानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा मुंबई में प्रथम आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने की उपलक्ष में जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वाधान में दो दिवसीय कार्यक्रम की कड़ी में पहले दिन प्रातः 151 कुंडीय यज्ञ-हवन के साथ जिला आर्य महासम्मेलन में वेद का संदेश दिया गया।
खुमरान पुल स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम की कड़ी में पहले दिन मुख्य यजमान समाजसेवी योगेश दहिया व डॉ. विनोद धीमान सहित 151 यज्ञ-कुंडों में हजारों की संख्या में श्रद्धापूर्वक यज्ञ-हवन किया जिसे आगरा से आमंत्रित वैदिक विद्वान आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने ब्रह्मा के रूप में संपन्न कराया। यजमानों को आशीर्वाद प्रदान करने के पश्चात आर्य महासम्मेलन में संबोधन करते हुए आचार्य अग्निहोत्री ने कहा कि महर्षि दयानंद ने वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया चूँकि वेद ईश्वरीय ज्ञान है। इस ईश्वरीय ज्ञान वेद में समस्त विज्ञान समाहित है जिसके माध्यम वैज्ञानिक नए-नए अविष्कार करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि आज विज्ञापनों में महिलाओं को प्रदर्शित करके मजाक बना दिया गया है। स्कूल के पाठ्यक्रम में इंसान बनाने का कोई भी पाठ्यक्रम नहीं है, मात्र संप्रदाय, पंथ, वर्ग, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि बनाया रहा है। आर्य समाज ही केवल मनुष्य को मनुष्य बनाने का सन्देश देता है।
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़