वृन्दावन की गलियों और मुख्य मार्गों पर ई-रिक्शों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है,
श्रद्धालु और स्थानीय लोग हर दिन जाम व अव्यवस्था से परेशान हैं, बिहारी जी और राधावल्लभ मंदिर की ओर जाने वाला अठखंभा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है, लोग आरोप लगा रहे हैं कि ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह नाकाम है या फिर इन रिक्शा चालकों को संरक्षण दे रही है, प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं, श्रद्धालुओं ने मांग की है कि शहर के अंदर ई-रिक्शा पूरी तरह प्रतिबंधित किए जाएं और केवल पैडल रिक्शा को ही अनुमति दी जाए।
लोकेशन: वृन्दावन, जिला मथुरा (उत्तर प्रदेश)
*पूरी खबर **
वृन्दावन।
श्रीकृष्ण की नगरी वृन्दावन में श्रद्धालु भक्ति भाव से आते हैं, लेकिन गलियों और मुख्य मार्गों पर ई-रिक्शों का आतंक उन्हें भक्ति से अधिक जाम और झुंझलाहट का अनुभव कराता है।
बिहारी जी मंदिर और राधावल्लभ मंदिर की ओर जाने वाले अठखंभा क्षेत्र की सड़कें आए दिन पूरी तरह ठप रहती हैं। श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक घंटों फंसे रहते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर गली और सड़क पर ई-रिक्शों की बाढ़ है। बच्चा हो या बूढ़ा, जिसे देखो ई-रिक्शा चला रहा है। बैटरी रिक्शा है, मेहनत शून्य और कमाई मोटी — यही कारण है कि बिना रोक-टोक यह धंधा फल-फूल रहा है।
लोग कहते हैं कि प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस सब जानते हुए भी चुप बैठे हैं। सवाल उठता है कि क्या यह पुलिस की नाकामी है या किसी प्रकार का संरक्षण मिल रहा है?
श्रद्धालुओं का कहना है कि पुलिस केवल दिखावे के लिए खड़ी रहती है, चालान या सख्त कार्रवाई लगभग न के बराबर होती है।
कई नागरिकों ने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक और स्थानीय संरक्षण के बिना संभव नहीं। अगर कोई बड़ा दबाव न हो, तो इतनी खुली मनमानी सड़क पर नहीं चल सकती।
अब तक की कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रही है। न तो कोई स्थायी समाधान सामने आया है और न ही गलियों में सुधार।
स्थानीय श्रद्धालुओं ने मांग की है कि शहर के अंदर ई-रिक्शों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। केवल पैडल रिक्शा को अनुमति मिले ताकि गलियों की पुरानी व्यवस्था लौट सके।
लोग व्यंग्य में कहते हैं कि अगर महामहिम राष्ट्रपति सप्ताह में एक दिन वृन्दावन भ्रमण करें तो अगले ही दिन सारी व्यवस्थाएं सुधर जाएंगी, लेकिन आम जनता की सुनवाई नहीं हो रही है।
शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर ई-रिक्शा चालकों को संरक्षण दिया जा रहा है।
अब सबकी नज़र प्रशासन और पुलिस पर है कि क्या वे कार्रवाई करेंगे या फिर श्रद्धालु और स्थानीय लोग इसी तरह जाम और अव्यवस्था के बीच परेशान होते रहेंगे।
नाम: अजय सोलंकी
पोस्ट: रिपोर्टर, मथुरा (UP)