राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित होने पर विशेश्वरगंज में उमड़ा सम्मान का सैलाब
इंडियन टी वी न्यूज
रिपोर्टर अनिल सोनी
ब्यूरो चीफ बहराइच
विशेश्वरगंज (बहराइच)। मंगलवार को ब्लॉक सभागार विशेश्वरगंज संस्कृत की मधुर ध्वनि और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जब श्री राम जानकी शिव संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, परसिया आलम के प्रधानाचार्य कृष्ण मोहन शुक्ल का भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। संस्कृत शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर नागरिकों और शिक्षकों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
यह समारोह राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, जनपद बहराइच (क्षेत्र विशेश्वरगंज) एवं स्थानीय नागरिकों के सहयोग से हुआ। सभागार खचाखच भरा रहा, “संस्कृत की जय” और “गुरु वंदन” के नारों से पूरा माहौल रोमांचित हो उठा। मंच पर अतिथियों का स्वागत पुष्पवर्षा, शॉल और प्रतीक चिह्न से किया गया।
मुख्य अतिथि विधायक सुभाष त्रिपाठी ने कहा—“कृष्ण मोहन शुक्ल जैसे समर्पित शिक्षक संस्कृत भाषा और भारतीय शिक्षा परंपरा के जीवंत प्रतीक हैं। इनके अथक प्रयासों से विद्यालय और क्षेत्र, दोनों का गौरव बढ़ा है।” उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है, और ऐसे शिक्षक इस आत्मा को जीवंत रखने का कार्य कर रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रमुख सच्चिदानंद पाठक, निशंक त्रिपाठी और आनंद पांडे ने भी शुक्ल के शिक्षा क्षेत्र में योगदान की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि शुक्ल का जीवन शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत है। समारोह में कई बार सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संरक्षक बलदेव प्रसाद पांडे, जिला उपाध्यक्ष शिव शंकर पाठक, ब्लॉक अध्यक्ष शरद चंद्र शुक्ल, ब्लॉक महामंत्री राजीव कुमार तिवारी, प्रशांत शुक्ल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षाविद और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष आनंद मोहन मिश्र ने की, जबकि मंच संचालन रवि मोहन शुक्ल ने शानदार ढंग से किया।
पूरे समारोह का वातावरण गर्व, सम्मान और उत्साह से सराबोर रहा। अंत में नागरिकों ने कहा कि कृष्ण मोहन शुक्ल जैसे शिक्षकों ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और समर्पण से संस्कृत जैसी प्राचीन भाषा को आज भी नई ऊर्जा दी जा सकती है। वास्तव में यह दिन विशेश्वरगंज और परसिया आलम दोनों के लिए गौरव का पर्व बन गया।