नन्दगोपाल पाण्डेय ब्यूरोचीफ सोनभद्र
सोनभद्र।ऊर्जा का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। बिना ऊर्जा के आज विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कल-कारखाने, व्यापारिक गतिविधियां, मैट्रो का संचालन, विद्युत रेल हो या अस्पताल, शिक्षण संस्थान, परिवहन सेवायें, घरेलू एवं व्यावसायिक उपयोग में विद्युत के बिना मनुष्य का वर्तमान जीवन रूक सा जाएगा। एक समय था जब गर्मी लगने पर हाथ से पंखे झेले जाते थे, रोशनी के लिए कुप्पी व लालटेन में केरोसिन का तेल डालकर बाती जलायी जाती थी। आज उनका स्थान तरह-तरह के इलेक्ट्रिक बल्ब, पंखों, कूलर व ए.सी. ने ले लिया है। रंग-बिरंगी एल. ई.डी. लाईट्स आज रात में भी दिन जैसा प्रकाश फैला रही है। आज विद्युत शहरी जीवन के साथ-साथ ग्रामीण जीवन में भी पूरी तरह से आवश्यक हो गई है। खेतों में सिंचाई के लिए विद्युत पम्पों का प्रयोग बहुत बढ़ा है, जिससे किसानों को फसल सिंचाई हेतु कम दर पर विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विद्युत को घरेलू विद्युत से अलग किया गया है।
विद्युत की अनिवार्यता के दृष्टिगत उसकी माँग भी बढ़ी है। आज के औद्योगीकरण व्यावसायिक एवं नगरीकरण की गति जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विद्युत की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम अब दिखाई देने लगा है। आज प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश का विद्युत उत्पादन एवं आपूर्ति के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर ठोस कदम बढ़ाया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए0के0 शर्मा के निर्देशन में प्रदेश में पारेषण क्षेत्र में किये गये कार्यों में स्थापित पारेषण तंत्र की क्षमता (ट्रासमिशन कैपेबिलिटी) में वृद्धि की गई है। प्रदेश के पारेषण क्षमता (ट्रांसमिशन कंपेबिलिटी) जो वर्ष 2016-17 में 17890 मेगावाट थी, वहीं 2024-25 में बढ़ाकर 31500 मेगावाट किया गया। पारेषण क्षमता को वर्ष 2025-26 में बढ़ा कर 32500 मेगावाट किया जाना लक्षित किया गया है। प्रदेश में पारेषण तंत्र की विद्युत आयात क्षमता (टी०टी०सी०) में वृद्धि की गई है। पारेषण तंत्र की विद्युत आयात क्षमता जो वर्ष 2016-17 में 7800 मेगावाट थी वही वर्ष 2024-25 में बढ़ाकर 16,700 मेगावाट किया गया। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 में विद्युत आयात क्षमता को बढ़ा कर 17500 मेगावाट किये जाने का लक्ष्य रखा है।
उ0प्र0 पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा 11 जून, 2025 को 31,486 मेगावाट की उच्चतम विद्युत मांग को सफलतापूर्वक वहन करते हुए आपूर्ति की है। वर्ष 2025-26 में 12 जून, 2025 को अधिकतम विद्युत आपूर्ति 655.90 मिलियन यूनिट की गयी। उसी तरह वर्ष 2024-25 में 17 जून, 2024 को अधिकतम विद्युत आपूर्ति 659.40 मिलियन यूनिट थी, जिसे सफलता पूर्वक आपूर्ति की गयी। प्रदेश में वर्ष 2024-25 में 13 नग विद्युत उपकेन्द्रों का ऊर्जीकरण किया गया है तथा परिवर्तकों की क्षमतावृद्धि सहित ग्रिड में 10,176 एम0वी0ए0 परिवर्तक क्षमता का सृजन एवं 1630 सर्किट किलोमीटर लाइनों का ऊर्जीकरण किया गया है। वर्ष 2025-26 में माह अगस्त, 2025 तक 03 नग उपकेन्द्रों का ऊर्जीकरण 946 ए0वी0ए परिवर्तक क्षमता का सृजन व 321 सर्किट कि0मी0 पारेषण लाइनों का ऊर्जीकरण किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 में 8,613 पावर ट्रांसफार्मर एवं 2,51,998 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रंासफार्मर एवं वर्ष 2025-26 में माह अगस्त, 2025 तक 8,832 पावर ट्रांसफार्मर एवं 2,63,940 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रंासफार्मर की स्थापना की गयी है। बिजनेस प्लान के अन्तर्गत वर्ष 2024-25 में 71 लक्ष्य के विरूद्ध 12 नये 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्रों का निर्माण, 123 नई लाइनों का निर्माण, 651 के सापेक्ष 448 नई 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्रों की क्षमता वृद्धि की गयी है। प्रदेश में अप्रेल, 2022 से विभिन्न योजनाओं में कुल 47 नए 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र ऊर्जीकृत किये गये एवं 1006 विद्युत उपकेन्द्रों की क्षमता बढ़ाई गयी है। किसानों के हित में वर्ष 2017-18 से अब तक 4,07,911 से अधिक निजी नलकूपों का विद्युत संयोजन किया गया है।