पूरा मामला गौरीगंज ब्लॉक के आनापुर गांव में बने खाद
समिति कार्यालय का है जहां कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रभारी किसानों को एक तरफ नियम कानून के तहत दो चार बोरी डीएपी के लिए घंटों लाइन में खड़ा करवाते हैं और 12 बजे से पहले किसान को डीएपी खाद नहीं देते वहीं खाद समिति में ऑपरेटर संदीप शर्मा झाड़ियों के किनारे नोटो की गड्डी गिनते हैं आखिर क्यों ऑपरेटर को झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है जब सारे नियम कानून के तहत किसानों को दो ,चार बोरी डीएपी के लिए कड़कड़ाती ठंड में रात भर जाग कर,घंटों लाइन में लगकर कभी डीएपी मिलती है तो कभी गोदाम में ताला लगाकर किसानों को कहा जाता है डीएपी खत्म है
फिलहाल गौरीपुर,के एक किसान ने नाम न छापने के डर से बताया कि यहां केवल चार से पांच गांव के लिए डीएपी आती है लेकिन ऑपरेटर और प्रभारी द्वारा शाहगढ़ ,ज़ामो,मुसाफिरखाना और दूर दूर तक नाजायज लाभ लेकर डीएपी को ब्लैक में बेच दिया जाता है
कई दिनों से किसानों द्वारा बताया जा रहा था कि ऑपरेटर बाहर पैसा लेकर डील करता है आज शुक्रवार को जब पत्रकार द्वारा आनापुर गांव की सच्चाई जानने गया तो सारी करतूत वीडीओ में कैद हो गई और ऑपरेटर झाड़ियों के किनारे पैसा लेकर डील करता दिखाई दिया!