जनपद कुशीनगर ब्यूरो चीफ राजेश मौर्य जान से खिलवाड़: अस्पतालो ने रजिस्ट्रेशन में ठूंस दिया डॉक्टर का फर्जी नाम
सीएमओ की क्रॉस चेकिंग में छह निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के लिए किए गए आवेदन में फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पताल संचालकों द्वारा ऑनलाइन किए गए आवेदन को निरस्त कर दिया गया है। आवेदन में डॉक्टर के दर्ज किए गए मोबाइल नंबर पर सीएमओ ने फोन किया तो उनके नाम पर किए गए आवेदन की जानकारी ही चिकित्सक को नहीं थी। वहीं वह अस्पताल संचालक को जानते भी नहीं हैं।
इसके अलावा 150 निजी अस्पतालों की ओर से किए गए आवेदन के दस्तावेज में गड़बड़ी मिलने पर निरस्त कर नोटिस जारी किया गया है, लेकिन अभी तक किसी निजी अस्पताल संचालक की ओर से कागजों में सुधार कर आवेदन दोबारा नहीं किया गया है। डीएचएस की बैठक में डीएम से इस पर चर्चा कर आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाएगा।
अवैध तरीके से संचालित निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसने के लिए शासन की ओर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। पहले बिना डॉक्टर से बात किए और अस्पताल देखे आवेदन के आधार पर रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता था।
पूर्व में इलाज के दौरान मरीजों की मौत होने और जांच में जिस डॉक्टर के नाम रजिस्ट्रेशन होता था उसको पता नहीं होने के कई मामले सामने आए।
इसके बाद निजी अस्पतालों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल में जाना है, यहां काम करने वाले स्टाफ, व्यवस्था के अलावा जिस डॉक्टर के नाम से रजिस्ट्रेशन हो रहा है, उससे संपर्क कर उसकी सहमति पत्र लेना हैं। बावजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई है। रजिस्ट्रेशन के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदन की जांच में नोडल अफसरों और बाबू को सब कुछ ठीक मिला था। संदेह होने पर सीएमओ ने ऑनलाइन आवेदन वाली सूची में दर्ज डॉक्टरों के नंबर पर फोन पर क्रॉस चेक किया तो पता चला कि छह डॉक्टरों ने आवेदन के लिए डिग्री देने तो दूर अस्पताल संचालक का नाम भी नहीं जानते थे।
इसमें रामकोला, खड्डा, पडरौना, तमकुहीराज, कसया और दुदही ब्लॉक के बिना डॉक्टर की जानकारी की डिग्री लगाकर आवेदन किए थे। सीएमओ की ओर से 150 निजी अस्पतालों के संचालकों को अंतिम नोटिस दिया गया है। इसमें कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन के लिए किए गए आवेदन में जो भी कमियां है उसे ठीक कर दोबारा आवेदन करें।
नोटिस जारी होने के 15 दिन बाद भी ऐसे अस्पताल संचालकों ने कमियों को ठीक कर दोबारा आवेदन नहीं किया है। सीएमओ ने बाबू और नोडल अफसरों का सख्त निर्देश दिया है कि जांच में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जाए,ऐसा होने पर विभागीय जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।