जनपद सहारनपुर के बिहारीगढ़ क्षेत्र में लंबे समय से खनन कार्य बंद होने के कारण गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। खनन पर निर्भर हजारों मजदूरों की रोज़ी-रोटी छिन गई है, वहीं स्टोन क्रशर उद्योग पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इसका असर न केवल मजदूरों पर बल्कि स्थानीय दुकानदारों, स्कूलों और आम जनता पर भी साफ दिखाई दे रहा है।खनन बंद होने से क्षेत्र के अधिकांश स्टोन क्रशर बंद पड़े हैं। क्रशर स्वामियों का कहना है कि बिना उत्पादन के भी प्रत्येक स्टोन क्रशर पर प्रति माह चार से पांच लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है, जिसे वहन करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है। करोड़ों रुपये की मशीनें बंद पड़ी-पड़ी जंग खा रही हैं और कबाड़ में तब्दील हो रही हैं।आर्थिक गतिविधियां ठप होने से स्थानीय बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानदार ग्राहकों की राह देख रहे हैं। मजदूरों के पास आय का कोई साधन न होने के कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है,क्योंकि वे स्कूल फीस तक नहीं भर पा रहे हैं। इससे स्कूल संचालकों के सामने भी संस्थान चलाना चुनौती बन गया है स्टोन क्रशर बंद होने का असर खनन सामग्री की कीमतों पर भी पड़ा है। जो सामग्री पहले चालीस से पचास रुपये प्रति कुंतल मिलती थी, वह अब सो रुपये से ऊपर पहुंच गई है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए अपना छोटा-मोटा आशियाना बनाना भी मुश्किल हो गया है। क्षेत्रवासियों और स्टोन क्रशर संचालकों ने सरकार से मांग की है कि खनन पर लगी पाबंदी को शीघ्र हटाया जाए, खनन पट्टों का आवंटन किया जाए और स्टोन क्रशरों को चलाने की अनुमति दी जाए, ताकि क्षेत्र में फिर से रोजगार के अवसर पैदा हो सकें और आर्थिक स्थिति सुधर सके।
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़