ITN National

इंडियन टीवी न्यूज

Advertisement

“माता भूमि का पुजारी है संघ”पारसनाथ मिश्र ने हिंदू सम्मेलनों में कहा

```

सोनभद्र। सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में शुक्रवार को विकासखंड छपका के परासी न्याय पंचायत के मानपुर पंचायत भवन प्रांगण, पसही न्याय पंचायत के ग्रामोदय शिशु मंदिर बहुअरा प्रांगण तथा विकासखंड चतरा के सिलथम न्याय पंचायत के आदिवासी इंटरमीडिएट कॉलेज सिल्थम प्रांगण में क्रमशः राजीव कुमार मिश्र, संतोष चौबे एवं पारसनाथ मिश्र की मुख्य आतिथ्य में हिंदू सम्मेलन संपन्न हुए।
मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय चिंतक पारसनाथ मिश्र पूर्व प्रवक्ता हैं। उन्होंने अब तक 18 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें भरत पर महाकाव्य “रामानुज भरत” प्रमुख है। इसकी सराहना पूज्य शंकराचार्यों, धर्मगुरुओं एवं शिक्षाविदों ने की है। उनकी 19वीं पुस्तक “प्रिय लागहूं मोहि राम” शीघ्र प्रकाशित होगी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने प्रत्येक कार्य से पूर्व भारत माता को भूसांस्कृतिक देवी मानकर ध्वज के समक्ष “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि” के रूप में सादर नमन करता है। संघ निर्भ्रांत रूप से “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का सात्विक एवं अभय पुजारी है। “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” का शुचि साहसिक विश्वासी है तथा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का आतुर अभिलाषी है।
संघ के रोम-रोम में लोकमंगल एवं राष्ट्रीय सर्वोपरिता का पावन प्रवाह प्रतिपल बहता रहता है। राष्ट्रहित इसका प्राण है और राष्ट्रसेवा इसके हृदय की धड़कन। इसकी श्वास-श्वास में वैयक्तिक अस्मिता और सुसंगठित सामाजिकता का अप्रतिम सामंजस्य है। आत्मिक अनुशासन इसका निर्मल स्वभाव है। उदात्त जीवन मूल्यों के अनुरक्षण में इसकी सामूहिक कर्तव्यनिष्ठा अबाध एवं अक्षुण्ण है। भारतीयता इसकी आकृति और मानवता इसका धर्म है।
पारसनाथ मिश्र ने कहा कि संघ समष्टि हित में व्यक्ति की निजता के विसर्जन का सतत आकांक्षी है। नग्न भोग नहीं, त्यागमय जीवन ही संघ की चर्या है। वह वैश्विक सुख-शांति का चिराग्रही है, एकता का साक्षी बन अनेकता का सेवक है। संघ रक्त, जाति, वंश, क्षेत्र या भाषा के आधार पर मानव श्रेष्ठता निर्धारित नहीं करता, बल्कि पावन समता की भूमि पर ईश्वरीय विभूतियों का निष्पृह आराधक है। सौ वर्षों से अपनी अनवरत आस्थाओं की साधना द्वारा बहुआयामी क्रियाकलापों को मूर्तमान करते हुए हिंदुत्व को प्रकर्षोन्मुख गढ़ा है। हिंदुत्व की रक्षा इसका पवित्र व्रत और राष्ट्रसेवा जीवन का संकल्प है। जितना तीव्र विरोध हुआ, उतनी ही तीव्रता से संघ आगे बढ़ता रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सतीश ने की। हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के जिला संयोजक आलोक कुमार चतुर्वेदी, खंड संयोजक नंदलाल विश्वकर्मा, खंड सहसंयोजक रमेश चौबे, निर्भय शंकर पांडे, लालू प्रसाद यादव, भूपेंद्र सिंह, राहुल जी (प्रचारक), मुन्ना धागर, बुद्धिनारायण धागर, सत्य प्रताप सिंह, सिद्धि शरणार्थी, श्रवण जायसवाल, मोहन बिंद, सुनील सिंह, शताब्दी वर्ष हर घर संपर्क अभियान जिला संयोजक अरुणेश पांडे, वीरेंद्र प्रताप सिंह, किरण त्रिपाठी, अमरेश चेरो, योगेंद्र बिंद, जय शंकर यादव आदि उपस्थित रहे।
सोनभद्र/दुद्धी (विवेक सिंह)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *