Indian tv news /ब्यूरो चीफ. करन भास्कर चन्दौली उत्तर प्रदेश
चन्दौली वाराणसी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली 2026 पर अगले आदेश तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक से छात्रों में खुशी तो है, लेकिन वह नियमावली वापस लेने की सरकार की घोषणा तक इसका इंतजार करेंगे। फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। नियमावली 2026 पर रोक लगाने के लिए बीएचयू के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी ने याचिका डाली थी। मृत्युंजय ने न्यायालय को धन्यवाद दिया और कहाकि यह हमारी पहली जीत है। लेकिन हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार इन नियम में बदलाव नहीं करता।
विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब 5 हजार छात्र कक्षाएं छोड़कर सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान छात्रों की प्राक्टोरियल बोर्ड से झड़प भी हुई। छात्र आंदोलन को देखते हुए तीन थानों की फोर्स लगाई गई है। इसकेको तैनात किया गया है। गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर बीएचयू समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेज होने लगे थे। छात्रों और सवर्ण समाज का कहना था कि वह सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ रिट याचिकाओं पर सुनवाई की और इस पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाये जाने के बाद विरोध के सुर में नरमी आने की उम्मीद है।
इस मामले में शोध छात्र मृत्युंजय ने कहाकि हमने 15 जनवरी को याचिका दायर की, जो 24 को फाइल हो गई थी और 29 जनवरी यानी आज की तारीख मिली थी। इसे लेकर सोशल मीडिया में मेरे खिलाफ तमाम पोस्ट भी चलाए गए। मेरे बाद बहुत से लोगों ने याचिका डाली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी को एक साथ सुना। हमें खुशी है कि हमारे अपील को गंभीरता सेलेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले से रोक लगाने की बात कही। हमलोगों ने सरकार के खिलाफ विश्वविद्यालय में मार्च निकाला। हम मांग करते हैं कि अब सरकार भी इस नियम को समाप्त करने की नोटिफिकेशन जारी करे। हम सरकार से अपील करते हैं कि ऐसे नियम न लागू किए जाएं जिससे समाज में विरोध बढ़े।
उधर, विश्वविद्यालय परिसर में विश्वनाथ मंदिर के पास बामपंथी दलों की छात्र इकाई के लोग बिल के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाने लगे। इस पर दूसरे गुट ने विरोध किया तो विवाद हो गया। इसे देखते हुए वहां पुलिस और प्राक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी पहुंच गये। दोनों पक्षों को समझाकर उन्हें शांत कराया। इस दौरान एक गुट के छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों पर आरोप लगाया कि उनके चढ़ाने पर विरोध हुआ।