अलवर स्थित ESIC मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। यहां पहली बार डबल फेस यूरेथ्रोप्लास्टी (Double Face Urethroplasty) नामक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
सर्जरी 42 वर्षीय मरीज गुलशन कुमार की की गई, जो लंबे समय से यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर (पेशाब की नली में सिकुड़न) की गंभीर समस्या से पीड़ित था। मरीज को पेशाब करने में अत्यधिक जोर लगाना पड़ता था और फिर भी पेशाब आने में काफी समय लगता था। कई जगह इलाज कराने के बावजूद उसे कोई राहत नहीं मिली।
29 जनवरी 2026 को मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया और 30 जनवरी 2026 को सफल ऑपरेशन किया गया।
जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
जांच के दौरान पाया गया कि मरीज की पेशाब की नली में कैल्सीफिकेशन (Calcium Deposition) हो चुका था, जिससे नली में गंभीर संकुचन हो गया था। इस कारण नली की अंदरूनी परत (Epithelium) को हटाना पड़ा।
कैसे हुई सर्जरी
इस जटिल ऑपरेशन में क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर लिंग की अंदरूनी नम त्वचा ( Inner preputial graft) का उपयोग किया गया और दोनों सतहों से नई नली बनाई गई, जिसे डबल फेस यूरेथ्रोप्लास्टी कहा जाता है। यह तकनीक अत्यंत जटिल मानी जाती है और बड़े चिकित्सा संस्थानों में ही संभव होती है।
यह सर्जरी गुर्दा एवं मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश सोनवाल के नेतृत्व में की गई, जो ESIC मेडिकल कॉलेज अलवर में पहली बार इस प्रकार का ऑपरेशन करने में सफल रहे।
21 दिन में पूरी तरह स्वस्थ
ऑपरेशन के 21 दिन बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अब उसे पहले की तरह सामान्य रूप से पेशाब हो रहा है। मरीज को किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।
अलवर के लिए बड़ी उपलब्धि
डॉ. महेश सोनवाल के अलवर आने से अब ऐसे जटिल यूरोलॉजी ऑपरेशन, जिनके लिए पहले मरीजों को दिल्ली या बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता था, वे अब स्थानीय स्तर पर अलवर में ही संभव हो गए हैं।
मेडिकल टीम
ऑपरेशन सर्जन: डॉ. महेश सोनवाल (गुर्दा एवं मूत्र रोग विशेषज्ञ)
नर्सिंग ऑफिसर: गजेन्द्र जी
असिस्टेंट: सुशील मौर्य
ESIC मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि अलवर जिले के चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
रिपोर्ट राज्य भारद्वाज अलवर राजस्थान