राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आज हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने जमा हुई इस विशाल भीड़ ने सड़कों को नारों से गूंजा दिया, जिसमें “चार श्रम कोड रद्द करो!”, “मोदी सरकार मुर्दाबाद!”, “महिला एवं बाल विकास विभाग मुर्दाबाद!” और “हमारा शोषण बंद करो!” जैसे उद्घोष गूंजते रहे। यह प्रदर्शन पूरे देश में फैल रही आंगनबाड़ी आंदोलन की लहर का हिस्सा है, जो 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और विरोध के रूप में उभरा है।
प्रदर्शन की अगुवाई अखिल भारतीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका फेडरेशन (AIFAWH-CITU) और अन्य यूनियनों ने की। कार्यकर्ताओं ने बताया कि लॉकडाउन के बाद थोपे गए पोषण ट्रैकर ऐप, फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और डिजिटल रिपोर्टिंग ने उनकी जिंदगी को नर्क बना दिया है। कई केंद्रों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की कमी के बावजूद ऑनलाइन डेटा भरने का दबाव है, जिससे मानदेय में कटौती हो रही है और बच्चों को पोषण आहार वितरण प्रभावित हो रहा है। जिला अध्यक्ष ममता राजा ने कहा, “हम 14 लाख से ज्यादा बहनें पूरे देश में ICDS योजना के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों की देखभाल करती हैं, लेकिन सरकार हमें ‘ऑनरेरी वर्कर’ मानकर न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन से वंचित रख रही है। चार नए श्रम कोड (कोड ऑन वेजेस, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और OSH कोड) हमारे हितों के खिलाफ हैं, क्योंकि ये योजना कार्यकर्ताओं को कवर नहीं करते। संगठनों का पंजीकरण रद्द करना और FRS जैसे सिस्टम थोपना पूरी तरह गलत है।”
प्रदर्शनकारियों ने 17-सूत्रीय (कुछ रिपोर्टों में 25-सूत्रीय) मांग-पत्र के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम मेमोरेंडम सौंपा। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
चार श्रम कोडों की समीक्षा और रद्दीकरण, क्योंकि ये आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन और सुरक्षा से बाहर रखते हैं।
65 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट पर कम से कम 5 लाख रुपये ग्रेच्युटी (असम-गुजरात मॉडल की तरह पूरे देश में लागू)।
मासिक पेंशन 15,000 रुपये या अधिक, साथ ही परिवार पेंशन की व्यवस्था।
मानदेय में तत्काल बढ़ोतरी (केंद्र से मात्र 2,700-2,800 रुपये मिलते हैं, राज्य योगदान से भी कुल कम है; मांग 20-24 हजार रुपये तक)।
FRS और पोषण ट्रैकर ऐप तत्काल रद्द, डिजिटल रिपोर्टिंग में सुधार और स्मार्टफोन/इंटरनेट सुविधा प्रदान।
सरकारी कर्मचारी का दर्जा, नियमितीकरण और अन्य लाभ जैसे मातृत्व अवकाश, स्वास्थ्य बीमा आदि।
एक अनाम कार्यकर्ता ने बताया, “हम दिन-रात 24×7 काम करती हैं—बच्चों को पोषण, टीकाकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता देती हैं—लेकिन बिना स्मार्टफोन के डिजिटल रिपोर्ट कैसे भरें? सरकार हमें मजदूर नहीं, स्वयंसेवी समझ रही है, जबकि हम लाखों परिवारों की रीढ़ हैं।”
यह प्रदर्शन कटनी तक सीमित नहीं रहा। आज पूरे मध्य प्रदेश (जैसे श्योपुर, मऊगंज, अनूपपुर) और देशभर में (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र आदि) आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बजट 2026-27 की ‘मौन नीति’ का विरोध किया, जिसमें योजना कार्यकर्ताओं के लिए कोई बढ़ोतरी या सुरक्षा नहीं है। AIFAWH ने 12 फरवरी को रास्ता/रेल रोको और आम हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे कई जगहों पर प्रभाव दिखा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मांगें अनसुनी रहीं, तो यह आंदोलन और तेज होगा, जो महिला सशक्तिकरण, पोषण मिशन और बाल कल्याण योजनाओं की जड़ों को हिला सकता है।
केंद्र और राज्य सरकारों ने अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। आंगनबाड़ी यूनियनों ने अल्टीमेटम दिया है—जल्द समाधान नहीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल और बड़े आंदोलन की चेतावनी।
क्या ‘मातृशक्ति’ की यह पुकार सुनी जाएगी, या शोषण का दौर जारी रहेगा? कटनी की सड़कों से उठी यह आवाज पूरे देश की बहनों की है—समय जवाब देगा।