दुद्धी सोनभद्र (विवेक सिंह)।
स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम बिडर गांव निवासी ड्राइवर रमाशंकर पुत्र शिव बरन ने विन्ध्याचल मंडल, मिर्जापुर के अपर आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर 57 हजार रुपये बकाया मासिक वेतन दिलाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने इंचार्ज बीडर द्वारा अधिवक्ताओं के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करने और शिकायत की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।
दिए पत्र में अवगत कराया गया कि रमाशंकर पुत्र शिव बरन परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य हैं, जो ड्राइवरी से गुजारा करते हैं। छत्तीसगढ़ के घिवरा गांव निवासी विवेक चंद्रा पुत्र पीताम्बर चंद्रा ने उन्हें अपनी 16 चक्का ट्रक (नंबर सीजी11बीके 0712) दो महीने के लिए 40 हजार रुपये मासिक वेतन पर चलाने का लालच दिया। रमाशंकर सहमत हो गए और दो महीने लगातार ट्रक चलाई, जिससे 80 हजार रुपये की कमाई हुई। लेकिन विवेक ने केवल 23 हजार रुपये दिए, शेष 57 हजार बकाया रख लिए।
25 जनवरी 2026 की रात 10 बजे बकाया मांगने पर विवेक, उनके पिता पीताम्बर और सतोष चौहान ने आरकेएम प्लांट के पास ढाबे पर रमाशंकर को बुलाया। वहां संतोष और पीताम्बर ने अपमानजनक शब्द कहकर धमकी दी और एक रुपया नहीं देंगे, ज्यादा बोलोगे तो गाड़ी चढ़ाकर मार देंगे। जिसके बाद डरकर रमाशंकर बीड़र दुद्धी लौट आए।
रमाशंकर ने पहले छत्तीसगढ़ के डभरा थाने में शिकायत की, लेकिन विवेक सरपंच होने से कोई कार्रवाई न हुई। दुद्धी कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया, तहसील दिवस पर क्षेत्र अधिकारी ने एसएचओ को भेजा, जिन्होंने कस्बा इंचार्ज बीडर को सौंपा। 17 फरवरी को दरोगा का फोन आया, लेकिन वे घर नहीं पहुंचे।जिसके बाद प्रार्थी ने अधिवक्ताओं को बुलाकर बीडर पेट्रोल पंप के पास ले जाया गया, जहां प्रार्थना पत्र देते समय दरोगा ने अधिवक्ताओं को अपशब्दों से डांटकर भगाया और कहा- “तुम्हारा मामला हम नहीं देखेंगे, जहां जाना है जाओ।”
आज 18 फरवरी बुधवार को रमाशंकर ने अपर आयुक्त महोदय को प्रार्थना पत्र सौंपकर बकाया वेतन दिलाने, धमकी और अपशब्दों की जांच तथा उचित कार्रवाई की मांग की है। गरीब मजदूर होने के कारण उन्होंने कहा कि मेहनत की कमाई के बिना परिवार का भरण-पोषण मुश्किल है। यह मामला स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े करता है, जहां प्रभावशाली लोग शोषण कर मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। अपर आयुक्त कार्यालय से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।