जिला ब्यूरो चीफ जावेद अली टीकमगढ़
पलेरा। पलेरा तहसील कार्यालय इन दिनों अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का केंद्र बना हुआ है। मुख्य गेट पर दोपहिया वाहनों की अवैध और बेतरतीब पार्किंग से किसान और आम नागरिक बेहाल हैं। हालात ऐसे हैं कि कार्यालय में प्रवेश करना भी किसी चुनौती से कम नहीं।
दूर-दराज से जमीन और राजस्व कार्यों के लिए आने वाले किसानों को पहले गेट पर खड़ी बाइक-स्कूटरों की “दीवार” पार करनी पड़ती है। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए स्थिति और भी खतरनाक बनी हुई है। रोजाना जाम जैसे हालात बनते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
सवाल पर भड़का जवाब
जब इस गंभीर जनसमस्या को लेकर पलेरा तहसीलदार कुलदीप सिंह ठाकुर से सवाल किया गया कि मुख्य गेट से अवैध पार्किंग हटाने को लेकर क्या कार्रवाई की जाएगी, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था।
तहसीलदार ने कहा—“तुमसे तो कुछ नहीं कहना, जो लिखना हो सो लिखो, तुम्हारा काम है समाचार लिखना।” यह बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि जनसमस्या के प्रति प्रशासनिक संवेदनहीनता को भी दर्शाता है। जब जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी ही जवाब देने से बचें, तो आम जनता आखिर किससे उम्मीद करे? किसान प्रताड़ित, प्रशासन बेपरवाह ।किसानों का कहना है कि मुख्य द्वार को अतिक्रमण मुक्त रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो यह गंभीर लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
मुख्य गेट से अवैध पार्किंग तत्काल हटाई जाए। जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए। स्थायी और व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था बनाई जाए। अब सवाल सीधा है— क्या प्रशासन जनता की सुविधा के लिए जागेगा, या फिर “जो लिखना हो लिखो” कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता रहेगा?