झाकिर झंकार डांग
“सशक्त महिला यानी सशक्त समाज” — इस विचार को साकार करती अनेक प्रेरक कहानियां आज ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रही हैं। राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण की मिशन मंगलम योजना ऐसी ही एक प्रभावी पहल है, जिसके माध्यम से बहनें अपनी प्रतिभा और कौशल को आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ रही हैं। डांग जिले के पिपलदहाड़ गांव की श्री गणेश सखी मंडल इसका जीवंत उदाहरण है।
पिपलदहाड़ गांव की निवासी 32 वर्षीय सुरेखाबेन बुधुभाई कामड़ी ने एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर के रूप में नौकरी की और लगभग ₹30 हजार मासिक आय अर्जित कर रही थीं। लेकिन वर्ष 2025 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी रचनात्मकता को व्यवसाय का रूप देने का साहसिक निर्णय लिया।
सुरेखाबेन ने कैनवास पर आदिवासी संस्कृति, जीवनशैली, पारंपरिक वेशभूषा और प्रकृति से जुड़े जीवन का चित्रण करना शुरू किया। उनकी अनोखी कला को जल्द ही पहचान मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने आसपास के गांवों की 10 महिलाओं को साथ लेकर श्री गणेश सखी मंडल के माध्यम से एक छोटा उद्योग शुरू किया।
मिशन मंगलम योजना के अंतर्गत मंडल को ₹15 हजार का रिवॉल्विंग फंड प्राप्त हुआ। इस सहायता से पेंटिंग के लिए आवश्यक सामग्री, कैनवास और रंग उपलब्ध कराए गए। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी और उनकी कला को बाजार तक पहुंचाने का मार्ग खुला।
वर्तमान में डांग दरबार में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और मेलों में श्री गणेश सखी मंडल की महिलाएं अपने हाथों से बनाई गई पेंटिंग्स का स्टॉल लगाकर बिक्री कर रही हैं। आदिवासी जीवन की सजीव अभिव्यक्ति वाली इन पेंटिंग्स को आगंतुकों से विशेष सराहना मिल रही है।
सुरेखाबेन बताती हैं, “पहले नौकरी में निश्चित आय थी, लेकिन आज अपनी कला से कमाई करने का आत्मसंतोष कहीं अधिक बड़ा है। सखी मंडल और सरकार की सहायता से अब हम आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।”
उल्लेखनीय है कि श्री गणेश सखी मंडल ने अल्प समय में स्वरोजगार का एक सशक्त मॉडल स्थापित किया है, जो शिक्षित युवतियों और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है। नौकरी छोड़कर स्वरोजगार की ओर बढ़ने की यह यात्रा आज आत्मनिर्भरता, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।
इस प्रकार डांग जिले के पिपलदहाड़ गांव की श्री गणेश सखी मंडल की बहनों ने कला, संस्कृति और संगठित प्रयासों के माध्यम से आत्मसम्मान और स्वावलंबन की नई दिशा स्थापित की है।