अकरम खान पटेल की रिपोर्ट।
बैतूल। भीमपुर ब्लॉक के 24 आदिवासी भाई-बहनों के लिए आज का दिन एक नया जीवन लेकर आया है। पिछले 4-5 महीनों से तमिलनाडु के ईरोड जिले में बंधक बनाकर रखे गए इन निर्दोष श्रमिकों को एक संयुक्त और साहसिक मिशन के बाद सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। इस मिशन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और वनवासी कल्याण आश्रम के समर्पित कार्यकर्ता प्रवीण डोल्के को इस संकट की पहली जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत इस संवेदनशील विषय को आगे बढ़ाया उन्होंने पूर्व जिला न्यायाधीश एवं सलाहकार, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग – एनसीएसटी प्रकाश उइके ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी दिशा-निर्देश दिए और सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता प्रथम दुबे को इस मिशन की जिम्मेदारी सौंपी। अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों के लिए समर्पित एडवोकेट प्रथम दुबे ने तत्काल इस मामले की तहकीकात की। बलू अल्लूराम (पीडि़त) की अंतिम लोकेशन को ट्रेस करते हुए उन्होंने ओलापलायम मायावर मंदिर (मोडाकुरिची, ईरोड) से मात्र 130 मीटर दूर सटीक स्थान का पता लगाया। यही वह क्लु था जिसने इस मिशन को सफल बनाया। 6 मार्च को एडवोकेट प्रथम दुबे ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने मामले की भयावहता देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और सलाहकार प्रकाश उईके को तमिलनाडु के डीजीपी मुख्य सचिव और बैतुल एसपी को नोटिस जारी करने हेतु निर्देश दिए। परिणाम आयोग के संज्ञान लेने और सटीक गूगल मैप पर जानकारी के कारण तमिलनाडु पुलिस हरकत में आई। मात्र 12 घंटों के भीतर ईरोड पुलिस ने दबिश देकर सभी 24 व्यक्तियों को सुरक्षित मुक्त करा लिया। रेस्क्यू किए गए लोगों में 13 नाबालिक लडक़े लड़कियां शामिल हैं जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। और 9 महिलाए भी शामिल है। 06 मार्च को करीब रात 9:40 बजे, ईरोड के पुलिस अधीक्षक ने प्रथम दुबे को फोन कर सूचना दी कि सभी 24 लोग अब पुलिस की सुरक्षा में हैं। आज रात उन्हें सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया है और कल कानूनी औपचारिकताओं के बाद उन्हें उनके गृह जिले बैतूल भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इस सफल अभियान के लिए अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, प्रकाश उइके, प्रवीण डोल्के, एडवोकेट प्रथम दुबे और तमिलनाडु पुलिस का सराहनीय योगदान रहा।
संपर्क -9424430686