बताया जा रहा है कि साल 2013 में एक हादसे में चौथी मंजिल से गिरने के बाद हरीश को गंभीर दिमागी चोट लगी थी, जिसके बाद से वह लगातार कोमा में थे और किसी भी इलाज से सुधार नहीं हो रहा था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद फैसला दिया कि हरीश को गरिमा के साथ मृत्यु का अधिकार दिया जा सकता है। कोर्ट के आदेश के बाद हरीश को दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका लाइफ-सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया की जा रही है। इस दौरान हरीश के माता-पिता और परिवार बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने अपने बेटे के अंगदान (Organ Donation) की भी इच्छा जताई है, ताकि उसके जाने के बाद भी कई लोगों को नई जिंदगी मिल सके।सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले के दौरान हरीश के माता-पिता के साहस और त्याग की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला मानवीय संवेदनाओं और गरिमा के साथ जीवन समाप्त करने के अधिकार से जुड़ा हुआ है।
Ishwar Kumar jha
Indian TV News Reporter (All India)