अहमदाबाद के साणंद इलाके में इन दिनों एक ऐसी गैंग सक्रिय थी, जो मासूमियत का मुखौटा पहनकर बुजुर्गों को अपना शिकार बनाती थी
इस गैंग का तरीका बड़ा ही शातिराना था। वे एक सीएनजी (CNG) रिक्शा में पैसेंजर बनकर बैठते थे ताकि किसी को शक न हो। गैंग में महिलाएं भी शामिल थीं, ताकि राह चलते बुजुर्गों को लगे कि रिक्शा सुरक्षित है
वारदात की रात
घटना 31 मार्च 2026 की है। एक बुजुर्ग व्यक्ति बावला रोड पर पैदल अपने घर की ओर जा रहे थे। तभी उनके पास एक रिक्शा आकर रुका रिक्शा में पहले से ही कुछ लोग सवार थे। बुजुर्ग को लगा कि यह एक साधारण सवारी रिक्शा है और वे उसमें बैठ गए
जैसे ही रिक्शा सुनसान जगह पर पहुँचा, रिक्शा में बैठे ‘पैसेंजर’ अचानक लुटेरे बन गए
एक आरोपी ने चाकू निकालकर बुजुर्ग की गर्दन पर लगा दिया, जबकि अन्य दो आरोपियों ने उन्हें बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। डरे-सहमे बुजुर्ग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही लुटेरों ने उनके कुर्ते में लगे सोने के चार बटन वजन करीब 1 तोला, कीमत ₹1,00,000) लूट लिए और उन्हें बीच रास्ते में फेंक कर फरार हो गए
पुलिस की घेराबंदी इस घटना ने इलाके में दहशत फैला दी
मामला दर्ज होते ही साणंद पुलिस एक्शन मोड में आ गई। पुलिस महानिरीक्षक राघवेन्द्र वत्स और पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश जाट के आदेश पर, पी.आई. बी.टी. गोहिल और डीवाईएसपी नीलम गोस्वामी ने जाल बिछाना शुरू किया
पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस और अपने मुखबिरों को सक्रिय किया। इसी बीच, कांस्टेबल कुलदीप सिंह वजुभा को एक पक्की खबर मिली कि यह गैंग फिर से किसी वारदात की फिराक में है
अंततः सलाखों के पीछे
पुलिस ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी की और कुछ ही दिनों के भीतर इस खतरनाक गैंग को दबोच लिया।
पकड़े गए आरोपियों में तीन पुरुष और एक महिला शामिल थी
पुलिस ने उनके पास से:
लूट के सोने के बटन वारदात में इस्तेमाल किया गया सीएनजी रिक्शा मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं
साणंद पुलिस की इस मुस्तैदी ने न केवल एक गिरोह का सफाया किया, बल्कि शहर के बुजुर्गों को फिर से सुरक्षा का अहसास कराया है
रिपोर्टर : धरा पटेल,साणंद