अकरम खान पटेल की रिपोर्ट
बैतूल। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की नींव उनके शुरुआती वर्षों के पोषण पर टिकी होती है। इसी उद्देश्य को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले भर में जिला कार्यक्रम अधिकारी गौतम अधिकारी के मार्गदर्शन में पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विनोबा वार्ड भाग-1 में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भागीदारी की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित मिशन नींव के जिला समन्वयक राधेश्याम काजले ने परिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि कुपोषण के विरुद्ध जंग केवल जागरूकता से ही जीती जा सकती है। उन्होंने चर्चा के दौरान विस्तार से बताया कि बच्चों के दैनिक भोजन में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम और आयरन की मात्रा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। श्री काजले ने कहा कि बच्चों को बाजार के जंक फूड के बजाय घर का बना ताजा भोजन, अंकुरित अनाज, दालें और मौसमी फल खाने चाहिए।
तिरंगा थाली और स्थानीय खाद्य पदार्थों पर चर्चा
क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मनीषा पवार, किरण बैस और गीता उबनारे ने तिरंगा थाली की अवधारणा को प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार हमारे ध्वज में तीन रंग होते हैं, उसी प्रकार हमारी थाली में भी सफेद (दूध-दही, चावल), हरा (पत्तेदार सब्जियां) और केसरिया, पीला (दालें और फल) रंग के खाद्य पदार्थ होने चाहिए। कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सहजन (मुनगा), नींबू और मोटे अनाजों के लाभ बताए, जो कम लागत में सर्वोत्तम पोषण प्रदान करते हैं।
स्वच्छता और पोषण का गहरा संबंध
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पोषण तब तक अधूरा है जब तक स्वच्छता न हो। परिजनों को बच्चों के हाथ धोने की सही विधि और स्वच्छ पेयजल के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि स्वच्छता के अभाव में संक्रमण होता है, जिससे शरीर को पोषण नहीं मिल पाता।