पुणे, सिंहगड रोड — जैन धर्म अनादि काल से चला आ रहा एक स्वतंत्र, प्राचीन एवं वैभवशाली धर्म है, यह किसी भी अन्य धर्म की शाखा नहीं है। अतः जैन समाज द्वारा अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता—ऐसा स्पष्ट एवं ठोस मत अखिल भारतीय जैन अल्पसंख्यक महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष संदीप भंडारी ने व्यक्त किया।
वे अक्षय तृतीया के पावन एवं शुभ अवसर पर अखिल भारतीय जैन अल्पसंख्यक महासंघ की सिंहगड रोड (पुणे) शाखा के उद्घाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यक्रम पूज्य आचार्य विराग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत भव्य, आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।
संदीप भंडारी ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार की विविध जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जैन समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने हेतु महासंघ निरंतर कार्यरत है। सिंहगड रोड शाखा भी इस दिशा में प्रभावी एवं संगठित प्रयास करेगी, ऐसा उन्होंने विश्वास व्यक्त किया।
इस अवसर पर पूज्य आचार्य विराग सागर जी महाराज ने जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, समृद्ध इतिहास एवं आध्यात्मिक परंपरा का सारगर्भित विवेचन करते हुए युवाओं को पंथ एवं संप्रदाय के भेदभाव को त्यागकर जैन समाज की एकता, संगठन एवं सशक्तिकरण हेतु कार्य करने का प्रेरणादायी संदेश दिया।
कार्यक्रम में भरत भुरट एवं सुहास शाह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदेशाध्यक्ष संदीप भंडारी द्वारा शाखा के नामफलक का विधिवत अनावरण किया गया।
जैन समाज के संगठन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सिंहगड रोड शाखा की कार्यकारिणी घोषित की गई, जिसमें श्री विक्रम ओसवाल को शाखा अध्यक्ष, श्री विक्रम बागरेचा को शाखा महामंत्री तथा आशिष गुंदेचा, महावीर बिनाकिया, जयेश लुंकड, पर्व ओसवाल एवं मयुर राठोड को प्रमुख पदों पर नियुक्त किया गया।
इस अवसर पर अभिजीत शाह, मयूर सरनोत, विनोद सोलंकी, जिनेंद्र कावड़िया, ऋषिकेश शाह, राजेश सालेचा, आनंद बाफना सहित अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समाजबंधु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह आयोजन जैन समाज के संगठन, एकता एवं अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।