रिपोर्ट संतन दास
कोपरा :- डिजिटल क्रांति के आज के इस युग में पहुंच जाने के पश्चात् भी छत्तीसगढ़ के आमजनों के लिए सुशासन आज भी तिहार का पर्याय है यह विडंबना कम शर्मनाक दृश्य ज्यादा है। इसका मतलब पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न आदरणीय अटल विहारी बाजपेयी के नाम पर सत्ता हथियाने वाले लोग वास्तव में अटल जी का ही माखौल उड़ा रहे और उनकी सुशासन देने की नीति का ढोल पीटकर अपने नकारापन का सबूत दे रहे है।
यदि ऐसा नही तो एक दिन का सुशासन तिहार की जगह सदा-सर्वदा के लिए सुशासन स्थापित मिलता। पश्चिम के देशों में मदर डे, फादर-डे और ना जाने कितने डे मनाते है जताने के लिए कि माता-पिता और जीवन का सम्मान करते है लेकिन यह बताने के लिए भारत में तो रोज ही माता-पिता-गुरू और जीवन का रोज ही सम्मान करना सिखाया जाता रहा है। जिस कारण कभी खास दिन की आवश्यकता नही पड़ती है बल्कि रोज ही हम अपने दैनदिन जीवन में सभी का सम्मान प्रगट करते रहते है।
अंचल के समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता गणेश साहू ने आज शासन और प्रशासन के इस रवैये पर खेद जताते हुए उक्त बाते कही है कि कुर्सीतोड़ लोग काम का दिखावा करने और प्रचार-प्रसार में बरसाती मेढ़को की तरह प्रतिवर्ष निकल आते है और समस्या ज्यों की त्यों सालों साल से पड़ी रहती है। 80 से 90 प्रतिशत शिकायते ग्रामीणों और किसानों की राजस्व, पुलिस और शासन की जनहितैषी योजनाओं को लेकर ही है तो ये अधिकारी बाकी दिनों में आखिर करते क्या है। कौन नही जानता कि बिना सुविधा शुल्क के किसी भी सरकारी आफिस में कोई फाईल नही सरकता है। मंत्री हो चाहे संत्री सभी को बराबर मालूम है कि समस्या कहा है तो ये लोग उसे निराकरण करने की बजाय अटल जी के नाम का ही सहारा क्यों ढूढ़ लाते है। क्या इन्ही दिनों के लिए राज्य निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। चौथाई सदी बितने को आया है डिजिटल क्रांति के दौर में पहुंच गये है। और कब तक यह नौटंकी चलनी चाहिए।
समाजसेवी श्री साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जेन जी का कोई अस्त्तिव ही नही है इसलिए यह रोग ना कभी दूर होगा ना ही शासन और प्रशासन स्तर पर होने ही दिया जावेगा। लोग अटल जी का मुखौटा लगाकर ही शासन चलाते रहेगे यही छत्तीसगढ़ का नसीब है जिसे चाहकर भी बदला नही जा सकेगा। इसलिए अच्छा होगा लोग इसे अपनी नीयति ही मान ले। सरकार बदलकर भी तो कुछ नही बदलता। व्यवस्था छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में तटस्थ की भूमिका में बना रहता है। श्री साहू ने प्रदेश की वर्तमान दशा और दुर्दशा को अटल जी के प्रति घोर अनास्था का प्रगटीकरण बताया है।