रिपोर्टर : ज़ाकिर ज़ंकार : आहवा डांग
डांग जिले के पिंपळसोंड गांव के श्मशान क्षेत्र में अंधविश्वास और जादूटोना से जुड़ा एक घिनौना मामला सामने आने से ग्रामीणों में भारी रोष और भय का वातावरण पैदा हो गया है। श्मशान की जमीन में गड्ढा खोदकर उसमें कथित तांत्रिक विधि और करणी में उपयोग होने वाली कई संदिग्ध वस्तुएं दबाई गई थीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग दस से बारह दिन पहले गांव के एक व्यक्ति का निधन हुआ था और श्मशान में अंतिम संस्कार किया गया था। ग्रामीण परंपरा के अनुसार अगले दिन “कर” रखा जाता है, जिस दिन लोग खेतों में काम करने नहीं जाते। उसी रात किसी अज्ञात भोंदूबाबा या तांत्रिक द्वारा श्मशान में अंधविश्वास आधारित तांत्रिक क्रिया किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
खुंटविहीर के पुलिस पाटिल यादव झिरवाळ तथा पिंपळसोंड के सेवानिवृत्त पुलिस पाटिल रतन खोटरे ने बताया कि श्मशान में लगभग डेढ़ से दो फुट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें रेडे पर सवार यमराज की रंगी हुई मिट्टी की मूर्ति, छह मिट्टी के पुतले, प्रत्येक पुतले के मुंह पर कच्चे धागे से बंधे महिला एवं पुरुषों के पासपोर्ट साइज फोटो, मुर्गा, देसी शराब सहित कई संदिग्ध वस्तुएं मिलीं।
इस घटना के सामने आने के बाद ग्रामीणों में अंधविश्वास और जादूटोना को लेकर भय का माहौल फैल गया। हालांकि गांव के लोगों ने एकजुट होकर ऐसे भोंदूपन और अंधविश्वास के खिलाफ सामूहिक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने श्मशान से इन सभी वस्तुओं को बाहर निकालकर गांव की सीमा से बाहर ले जाकर अग्निदाह कर नष्ट कर दिया
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है तथा ऐसी अंधविश्वास फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।