संतन दास मानिकपुरी रिपोर्ट
गरियाबंद
छुरा प्रखंड के ग्राम फुलझर में जातिगत भेदभाव चरम सीमा पर है। जहाँ पर जमीन विवाद को लेकर प्रार्थी के ऊपर ही षड्यन्त्रपूर्वक एसटी/एससी धारा के तहत झूठे मुकदमे में पूरे परिवार को जेल भेज दिया गया। जिसमें माननीय विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटीज) रायपुर ने जमानत दे दी। मामला थाना फिंगेश्वर अंतर्गत ग्राम फुलझर का है जहाँ प्रार्थी डीहू राम साहू ने अपने 40 वर्षों से काबिज आबादी जमीन पर मंदिर निर्माण के लिये गिराए मटेरियल को ग्राम के ललेशरू ध्रुव ,भूषण सेन ने काबिज जमीन को जबरन हड़पकर उ बाउंड्रीवाल लगा दी। प्रार्थी द्वारा विरोध करने पर ललेशरु ध्रुव,सूरज ध्रुव गाली-गलौज करने लगा। मामला कुछ देर में शांत हो गया किन्तु असली षड्यंत्र संतु ध्रुव ने रचना शुरू कर दिया। दिनांक 09.04.26 को संतु ध्रुव, चेतन ध्रुव, हनुमत ध्रुव के नेतृत्व में धरसा पारा में अपनी सामाजिक बैठक रखी। जबकि मामला ग्रामीण समाज का था,प्रार्थी को झूठे मुकदमे में फंसाने व्यापक तैयारी की थी। दूसरे दिन रात्रि 8 बजे ग्राम में मुनादी करवाकर बैठक बुलाया गया, ग्राम के मुखिया डीहू राम साहू के ऊपर जमीन छुड़वाने लगभग 30 लोगों ने षड्यंत्रपूर्वक दबाव बनाया , न मानने पर बैठक में उपस्थित बेटे परमेश्वर को अनियंत्रित भींड ने जानलेवा हमला कर दिया बीचबचाव आए पिता को भी बेरहमी से पीटकर मुखिया के पद से इस्तीफा की मांग की गई। लहूलुहान पिता पुत्र थाना की शरण पहुंचे, किन्तु वहाँ भी इनका त्वरित एफआईआर नहीं की गई।
उल्टे फिंगेश्वर पुलिस ने प्रार्थी व उनके परिवार के ऊपर BNS की धारा 296, 115(2), 3(5), और ST/SC एक्ट की धारा 3(1)द, के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया । योगेश्वर साहू जो कहीं भी प्रकरण में शामिल नहीं था, के ऊपर फर्जी तरीके से कार्रवाई करवाई गई जिसकी निष्पक्ष जांच के लिये पुलिस अधीक्षक गरियाबंद, पुलिस महानिदेशक रायपुर को आवेदन किया गया है। यह दूसरी बार है जब डीहू राम साहू व परिवार के ऊपर फर्जी ST/SC का केस आरोपित कर प्रार्थी को ही प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रार्थी की शिकायत पर अपराध क्रमांक 0107/26 पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई जबकि उनके विरुद्ध पक्ष का प्र.स.प.क्र. 109/26 पर त्वरित कार्यवाही की गई। पीड़ित ने पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लगाया तथा निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की अपील की है।प्राप्त नकलनुसार पूर्व में जांच का नतीजा मामले को झूठी रिपोर्ट/ तथ्यात्मक त्रुटि / दीवानी प्रकृति का मानकर अंतिम रिपोर्ट में, केस बंद करने की सिफारिश की गई थी लेकिन बाद में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।