किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर।
लोक निर्माण विभाग (PWD) में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ब्लैकलिस्टेड कंपनी को कथित तौर पर फर्जी शपथ पत्र के आधार पर करीब 13 करोड़ रु के निर्माण कार्यों के ठेके आवंटित कर दिए गए। मामले के सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनी पहले से ही ब्लैकलिस्टेड थी, बावजूद इसके उसने कथित रूप से गलत जानकारी वाला शपथ पत्र प्रस्तुत कर निविदा प्रक्रिया में भाग लिया और करोड़ों रु के ठेके हासिल कर लिए।
आरोप है कि दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरती गई, जिससे नियमों की अनदेखी करते हुए कंपनी को काम सौंप दिया गया।
मामले के उजागर होने के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। यह सवाल उठ रहा है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी के दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई और उसे पात्र कैसे घोषित किया गया।
अब इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित ठेकों को निरस्त करने के साथ-साथ दोषियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।