किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जुड़े एक संवेदनशील और तकनीकी मामले में महत्वपूर्ण रुख अपनाया है।
‘रविशंकर महाराज बनाम सीबीआई’ प्रकरण की सुनवाई के दौरान अदालत ने फोन इंटरसेप्शन (फोन टैपिंग) की कानूनी प्रक्रिया और वैधानिक प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए।
मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तृत शपथ पत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि फोन इंटरसेप्शन जैसे मामलों में कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं और नागरिकों के निजता के अधिकार का पालन अत्यंत आवश्यक है। इसी संदर्भ में दोनों पक्षों से संबंधित तथ्यों और कानूनी आधारों को शपथ पत्र के माध्यम से रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अब मामले की अगली सुनवाई में दाखिल किए जाने वाले शपथ पत्रों के आधार पर डिवीजन बेंच आगे की कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक निर्देश तय करेगी।
यह मामला फोन टैपिंग की वैधता और जांच एजेंसियों की शक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों के कारण विशेष महत्व रखता है।