कहते हैं कि मेहनत, ईमानदारी और दूसरों की सेवा करने का जज़्बा हो तो इंसान फर्श से अर्श तक का सफर तय कर सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है कुशांक चौहान की, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर ग्लोबल शांति केयर हॉस्पिटल की स्थापना की। उनका उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि मानव सेवा को अपना सबसे बड़ा धर्म मानना है।
आज ग्लोबल शांति केयर हॉस्पिटल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी जाना जाता है। अस्पताल की ओर से हर मंगलवार और शनिवार को निःशुल्क भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों जरूरतमंद और आम लोग प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण करते हैं।
इसके अलावा अस्पताल में हर बुधवार निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया जाता है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों की जांच करते हैं और उन्हें आवश्यक परामर्श व दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पहल से अनेक गरीब और जरूरतमंद लोगों को राहत मिल रही है।
कुशांक चौहान का मानना है कि समाज से मिला सम्मान तभी सार्थक है जब उसे समाज की भलाई में लगाया जाए। यही सोच उन्हें एक सफल उद्यमी के साथ-साथ एक संवेदनशील समाजसेवी भी बनाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो सफलता मिलने के बाद भी जरूरतमंदों का हाथ थामे रखते हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची सफलता केवल धन कमाने में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में खुशियाँ और उम्मीदें बाँटने में है।
निष्कर्ष:
कुशांक चौहान की यह यात्रा केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और समर्पण का संदेश है। ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाते हैं कि यदि इरादे नेक हों, तो सफलता के साथ लोगों का आशीर्वाद भी मिलता है।
जिला ब्यूरो चीफ
तल्हा मिर्ज़ा
शामली
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