गोंडा।मंडलायुक्त कार्यालय में जन समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निस्तारण का एक बड़ा असर देखने को मिला है। दबंगों द्वारा पिछले 4 साल से बंद किए गए रास्ते को मंडलायुक्त की सख्ती के बाद प्रशासन ने खुलवा दिया है। 4 साल बाद न्याय मिलने पर पीड़ित गरीब परिवार ने सपरिवार मंडलायुक्त से मिलकर भावुक मन से उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।
क्या था पूरा मामला?
गोंडा जिले के ग्राम पंचायत सुरती (मौजा रामनगर तरहर, थाना कोतवाली देहात) के रहने वाले भवानीभीख गुप्ता (पुत्र राम समुझ गुप्ता) का पुश्तैनी रास्ता और निकास उनके ही गांव के कुछ विपक्षी दबंगों ने पिछले 4 साल से जबरन बंद कर रखा था। रास्ता बंद होने के कारण पीड़ित परिवार के पास मुख्य मार्ग तक जाने का कोई जरिया नहीं बचा था। मजबूरी में परिवार को दूसरे के खेतों से होकर छिपते-छिपाते मुख्य सड़क तक आना-जाना पड़ता था।
दफ्तरों के चक्कर काट कर थक चुका था परिवार
पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए थाना दिवस, तहसील दिवस और तमाम उच्च अधिकारियों के चौखट पर गुहार लगाई, लेकिन सालों तक उनकी पीड़ा का कोई समाधान नहीं हो सका। थक-हारकर कुछ महीने पहले पीड़ित परिवार ने मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल और अपर आयुक्त मीनू राणा से मुलाकात की और अपनी व्यथा सुनाई।
मंडलायुक्त की त्वरित कार्रवाई से मिली राहत
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया और इसे प्राथमिकता पर रखते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। प्रशासनिक मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि सालों से बंद पड़े रास्ते को पूरी तरह से सुचारू रूप से चालू करवा दिया गया।
खुशी के आंसू के साथ जताया आभार
रास्ता खुलने की खुशी में भवानीभीख गुप्ता आज अपने सपरिवार—जिसमें उनकी पत्नी सूर्यकला, दो बहुएं सुशीला देवी व किरन देवी, पुत्र विजय कुमार और पोता-पोती शामिल थे—मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। परिवार ने मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल से सप्रेम भेंट कर उन्हें सम्मानित किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। इस भावुक पल के दौरान पीड़ित परिवार की मदद करने वाले उनके पारिवारिक अधिवक्ता श्रीराम गुप्ता भी उपस्थित रहे।
यह मामला यह साबित करता है कि यदि आला अधिकारी जनसुनवाई को गंभीरता से लें, तो बरसों से दबे पीड़ितों को भी चंद दिनों में न्याय मिल सकता है।
श्रीनाथ रस्तोगी