किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
दुर्ग। सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से दुर्ग यातायात पुलिस एवं पिंक पेट्रोलिंग टीम द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा “ऑपरेशन विश्वास” सकारात्मक परिणाम देने लगा है। अभियान के तहत नाबालिग वाहन चालकों पर प्रभावी नियंत्रण और स्कूलों में व्यापक जन-जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पुलिस की लगातार कार्रवाई और अभिभावकों की काउंसलिंग का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। हाल के अभियान के दौरान पूरे जिले में केवल 5 नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई। वहीं, पिछले चार दिनों में कुल 94 नाबालिगों पर कार्रवाई करते हुए उनके अभिभावकों को पुलिस कंट्रोल रूम बुलाकर समझाइश दी गई। इस दौरान अभिभावकों से यह संकल्प भी लिया गया कि वे अपने बच्चों को वैध ड्राइविंग लाइसेंस मिलने तक वाहन नहीं सौंपेंगे।
अभियान के तहत जिले के 16 प्रमुख विद्यालयों में विशेष सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें शारदा विद्यालय, मैत्री विद्या निकेतन, बेथनी विद्यालय, मानसरोवर विद्यालय, स्वामी आत्मानंद विद्यालय, फरीद नगर विद्यालय और जनता स्कूल भिलाई-03 सहित अन्य स्कूल शामिल रहे। कार्यक्रमों में लगभग 8,000 छात्र-छात्राओं को हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व, निर्धारित गति सीमा, यातायात संकेतों के पालन तथा कम उम्र में वाहन चलाने के खतरों की जानकारी दी गई। साथ ही विद्यार्थियों को यातायात नियमों के पालन की शपथ भी दिलाई गई।
दूसरी ओर, स्कूल बसों, ऑटो, वैन और ई-रिक्शा जैसे विद्यालय परिवहन वाहनों के दस्तावेजों—ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस, बीमा और परमिट—की सघन जांच भी की जा रही है। क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने या असुरक्षित संचालन पाए जाने पर संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस द्वारा विद्यालयों में गोपनीय संवाद की व्यवस्था भी बनाई गई है, ताकि उत्पीड़न संबंधी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
दुर्ग पुलिस ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन चलाने के लिए न दें, क्योंकि थोड़ी-सी लापरवाही गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण बन सकती है।