कयामपुर, मंदसौर
मंदसौर जिले की ग्राम पंचायत कयामपुर में सरकारी खर्च से जुड़े नाश्ते और मिठाई के बिलों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए तीन अलग-अलग बिलों में कुल ₹17,860 के भुगतान का उल्लेख है। बिलों में मावे की बर्फी, देशी घी के लड्डू, समोसे और नमकीन जैसी खाद्य सामग्री दर्ज बताई जा रही है।हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों का दावा है कि करीब 9 महीने से पंचायत में कोई बैठक आयोजित नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बैठक या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मेहमान ही नहीं आए, तो आखिर इतनी बड़ी मात्रा में नाश्ता और मिठाई किसके लिए खरीदी गई?
तीन बिलों में हुआ भुगतान
उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीन अलग-अलग बिलों में ₹3,725, ₹7,045 और ₹7,090 की राशि का भुगतान किया गया है। तीनों को जोड़ने पर कुल रकम ₹17,860 होती है।मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज है कि सरकारी राशि से खरीदी गई खाद्य सामग्री का वास्तविक उपयोग कहां और किस अवसर पर हुआ। यदि किसी बैठक, कार्यक्रम या अन्य अधिकृत आयोजन के लिए यह खर्च किया गया था, तो उसकी बैठक कार्यवाही, उपस्थिति रजिस्टर, संबंधित स्वीकृति और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
‘बिना बैठक के दावत’ पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में जब बैठक ही नहीं हुई, तो नाश्ते और मिठाई के बिल कैसे तैयार हुए? क्या इन भुगतानों के पीछे कोई वास्तविक कार्यक्रम था? यदि था तो उसमें कौन-कौन शामिल हुए? सामग्री कहां से खरीदी गई और उसका वितरण किसे किया गया?यह मामला महज नाश्ते और मिठाई के बिल का नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बन गया है।
जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा सच
अब ग्रामीणों की नजर पंचायत विभाग और संबंधित अधिकारियों पर है। जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर बिल, वाउचर, भुगतान रजिस्टर, पंचायत बैठक की कार्यवाही, उपस्थिति रजिस्टर और संबंधित खरीद रिकॉर्ड का मिलान किया जाए। जांच में यदि भुगतान नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—जब बैठक ही नहीं हुई, तो ₹17,860 की यह ‘सरकारी दावत’ आखिर किसने उड़ाई?
जिला ब्यूरो चीफ मंदसौर रामप्रसाद धनगर गुर्जर पत्रकार की खास खबर