दुद्धी सोनभद्र। दुद्धी विकास खण्ड अंतर्गत के श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली में आयोजित 80वीं रामलीला के पांचवें दिन सोमवार की रात आस्था, रोमांच और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। धनुष यज्ञ के दौरान भगवान श्रीराम के शिवधनुष तोड़ते ही पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद जनकनंदिनी सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डालकर स्वयंवर की परंपरा पूर्ण की। इस अलौकिक दृश्य पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ जयकारे लगाए। वहीं, रावण-बाणासुर संवाद और लक्ष्मण-परशुराम के बीच हुए तीखे वाक्-युद्ध ने रामलीला को और भी रोमांचक बना दिया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ रामायण आरती के साथ हुआ। रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल एवं उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया ने मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी संजय श्रीवास्तव, निवासी फुलवार, को माला पहनाकर तथा अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। इसके बाद मुख्य अतिथि ने प्रभु श्रीराम की आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने रामलीला में अभिनय करने वाले सभी पात्रों को 500-500 रुपये तथा व्यास जी को 1,100 रुपये देने की घोषणा की।
मंचन के दौरान राजा जनक ने सीता स्वयंवर के लिए शर्त रखी कि जो वीर भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में पहुंचे अनेक राजा-महाराजाओं और बलशाली योद्धाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभी असफल रहे। राजाओं की विफलता से निराश राजा जनक की व्यथा सुनकर लक्ष्मण का क्षत्रिय स्वाभिमान जाग उठा। उनके ओजस्वी संवादों ने सभा में उत्साह भर दिया। इसी बीच गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़े। उन्होंने भगवान शिव को प्रणाम किया और सहजता से धनुष उठा लिया। जैसे ही उन्होंने प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, धनुष भयंकर गर्जना के साथ टूट गया। धनुष भंग होते ही मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
इसके बाद सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। राम-सीता के मिलन का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भावुक और अविस्मरणीय क्षण बन गया। कलाकारों ने मिथिला के स्वयंवर का ऐसा सजीव चित्रण किया कि पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
धनुष भंग की सूचना पर भगवान परशुराम जनक की सभा में पहुंचे और शिवधनुष तोड़ने वाले के बारे में पूछताछ करने लगे। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखे संवादों का दौर शुरू हुआ। लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण और ओजस्वी जवाबों तथा परशुराम के क्रोधपूर्ण अभिनय ने दर्शकों में रोमांच पैदा कर दिया। अंततः भगवान श्रीराम ने अपनी विनम्रता, मर्यादा और दिव्य तेज से परशुराम का क्रोध शांत किया। वहीं, इससे पूर्व रावण और बाणासुर के बीच शक्ति, पराक्रम और अहंकार को लेकर हुए संवादों ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
इस मौके पर रामलीला मंडली के व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया, समिति अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, कोषाध्यक्ष अमित कुमार कन्नौजिया, उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया, राजनाथ गोस्वामी, उपेंद्र श्रीवास्तव, विंध्याचल कन्नौजिया, बुद्धदेव कन्नौजिया, बुद्धिनाथ कन्नौजिया सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी, कलाकार और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।