
ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल मुख्य रूप से कृषि कार्यों और सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। इसमें यात्रियों को बैठाकर ले जाना सुरक्षित नहीं माना जाता। ट्रॉली में बैठने वाले लोगों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। रात के समय अंधेरा होने और सड़क पर दूसरे वाहनों की आवाजाही के बीच खतरा और बढ़ जाता है। अचानक ब्रेक लगने, ट्रॉली के असंतुलित होने या वाहन के पलटने की स्थिति में लोगों को गंभीर चोट लग सकती है।
अक्सर देखा जाता है कि लोग इन खतरों को नजरअंदाज कर यात्रा करते हैं। जब कोई दुर्घटना हो जाती है, तब सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल उठने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले से ही सावधानी बरती जाए।
स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने के साथ ही संबंधित विभागों को भी ऐसे मामलों पर ध्यान देने की जरूरत है। लोगों को समझना होगा कि कुछ दूरी तय करने के लिए जोखिम उठाना उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा पर भारी पड़ सकता है। सुरक्षित सफर के लिए यातायात नियमों का पालन और सावधानी बेहद जरूरी है।