सुपौल
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल श्री राजेश कुमार बच्चन के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के कार्यालय में पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्री अमित गौरव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य माननीय अध्यक्ष महोदय के उस विजन को धरातल पर साकार करना था, जिसके तहत सुपौल न्यायक्षेत्र के समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय एवं विधिक सहायता की पहुँच सुनिश्चित की जा सके, ताकि आर्थिक, सामाजिक अथवा अन्य किसी कारण से कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।
बैठक में PLVs को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आम जनता के बीच सक्रिय रूप से पहुँच बनाकर उन्हें उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, मध्यस्थता, पीड़ित प्रतिकर, महिला एवं बाल अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार तथा अन्य विधिक सेवा योजनाओं के संबंध में जागरूक करें।
‘Mediation for the Nation 3.0’ के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर
बैठक में विशेष रूप से ‘Mediation for the Nation 3.0’ अभियान के संबंध में PLVs को जानकारी दी गई। वर्ष 2026 में चलाए जा रहे इस विशेष मध्यस्थता अभियान का उद्देश्य लंबित मामलों के मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण एवं शीघ्र समाधान को बढ़ावा देना है। यह अभियान 01 अगस्त 2026 से 31 दिसम्बर 2026 तक चलाया जा रहा है।
PLVs को निर्देशित किया गया कि वे आम लोगों को मध्यस्थता के लाभों के संबंध में जागरूक करें तथा ऐसे उपयुक्त मामलों की पहचान करें, जिनका समाधान पक्षकारों की सहमति से मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है। उन्हें यह संदेश जन-जन तक पहुँचाने को कहा गया कि मध्यस्थता समय एवं खर्च की बचत के साथ-साथ पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है।
सचिव, डीएलएसए, सुपौल श्री अमित गौरव ने कहा कि PLVs विधिक सेवा संस्थानों और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु हैं। उन्होंने PLVs से अपेक्षा की कि वे ‘Mediation for the Nation 3.0’ अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा लोगों को लंबित विवादों के वैकल्पिक एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता अपनाने हेतु प्रेरित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि विधिक जागरूकता का उद्देश्य केवल लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी देना नहीं है, बल्कि उन्हें न्याय तक पहुँचने के सरल, सुलभ और वैकल्पिक माध्यमों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराना है।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विधिक जागरूकता तभी सार्थक होगी जब वह समाज के उन वर्गों तक पहुँचे, जो स्वयं अपने अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करने अथवा न्यायिक संस्थाओं तक पहुँचने में कठिनाई महसूस करते हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा यह संकल्प दोहराया गया कि “न्याय केवल न्यायालय तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।” इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए PLVs की सक्रिय भागीदारी, व्यापक विधिक जागरूकता तथा ‘Mediation for the Nation 3.0’ जैसे अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।