डीबीडब्ल्यू 187 और डीबीडब्ल्यू 303 बेहतर चपाती गुणवत्ता के लिए उपयोगी, क्षेत्र व मिट्टी के अनुसार करें बीजों का चुनाव
परसपुर गोण्डा।। गेहूं की खेती में बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी गुणवत्ता वाला आटा प्राप्त करने के लिए उन्नत किस्मों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। चपाती और रोटी की गुणवत्ता गेहूं की प्रजाति, उसमें मौजूद प्रोटीन व ग्लूटेन की मात्रा तथा आटे की पानी सोखने की क्षमता पर निर्भर करती है। किसानों को अपनी जलवायु, मिट्टी और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार गेहूं की किस्मों का चुनाव करना चाहिए। यह जानकारी एडीओ एजी अनूप सिंह चौहान ने दी।
उन्होंने बताया कि डीबीडब्ल्यू 303 (करण वैष्णवी) अच्छी चपाती गुणवत्ता और लगभग 12.1 प्रतिशत प्रोटीन के लिए जानी जाती है। वहीं डीबीडब्ल्यू 187 (करण वंदना) पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सहित संबंधित क्षेत्रों के लिए उपयोगी किस्म है। इसमें अच्छी चपाती गुणवत्ता के साथ पोषण संबंधी गुण भी पाए जाते हैं। इसके अलावा डीबीडब्ल्यू 370 (करण वैदेही) मुलायम रोटी बनाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जबकि पीबीडब्ल्यू 872 अच्छी चपाती गुणवत्ता और आटे के बेहतर गुणों के लिए जानी जाती है।
एडीओ एजी ने बताया कि सी-306 पारंपरिक रूप से अच्छी चपाती गुणवत्ता के लिए पहचानी जाती है। वहीं एचयूडब्ल्यू 234 में प्रोटीन और ग्लूटेन का संतुलन चपाती बनाने के लिहाज से उपयोगी है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि किसी भी किस्म का चयन केवल रोटी की गुणवत्ता के आधार पर न करें, बल्कि उसकी क्षेत्रीय अनुकूलता, बुवाई का उपयुक्त समय, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन क्षमता को भी ध्यान में रखें।
उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को डीबीडब्ल्यू 187 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बीज खरीदने से पहले अपने जिले और क्षेत्र के लिए उसकी अनुशंसा की पुष्टि अवश्य कर लें। साथ ही प्रमाणित बीज का ही प्रयोग करें, ताकि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर बनाया जा सके।
