बारीपदा: मयूरभंज जिले के एक सरकारी आवासीय विद्यालय में दसवीं कक्षा की नाबालिग आदिवासी छात्रा के गर्भवती होने और बाद में समय से पहले एक बच्चे को जन्म देने के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। जन्म के बाद गंभीर हालत में बारीपदा स्थित पंडित रघुनाथ मुर्मू (पीआरएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती नवजात शिशु की गुरुवार शाम मौत हो गई। वहीं, इस मामले में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहे एक युवक के बयान ने पूरे घटनाक्रम को और उलझा दिया है।
छात्रा की सुरक्षा और जिम्मेदारी निभाने में गंभीर लापरवाही के आरोपों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। संबंधित विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका को ओडिशा सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली एवं सीसीए नियमों के तहत प्रखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय के नजदीकी गांव के रहने वाले आरोपी युवक ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि पिछले सितंबर महीने में उसका छात्रा के साथ शारीरिक संबंध हुआ था। हालांकि, उसने दावा किया है कि जन्मा बच्चा उसका नहीं है।
बताया जाता है कि छात्रा का मासिक धर्म बंद होने की जानकारी मिलने पर युवक ने प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीदकर जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसने 1 नवंबर को एक दवा दुकान से गर्भपात में इस्तेमाल होने वाली दवा खरीदकर छात्रा को देने की बात स्वीकार की है।
आरोप के मुताबिक, दवा सेवन के दो दिन बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और बाद में समय से पहले प्रसव हो गया। हालांकि, गर्भपात की दवा कहां से और किन परिस्थितियों में खरीदी गई थी, इसकी जांच की जा रही है।
इस घटना ने सरकारी आवासीय विद्यालयों में नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था होने के बावजूद बाहरी युवक के साथ छात्रा का संपर्क कैसे हुआ? क्या विद्यालय प्रबंधन को छात्रा के गर्भवती होने की जानकारी पहले से थी? बिना उचित चिकित्सकीय परामर्श और कानूनी प्रक्रिया के गर्भपात की दवा कैसे उपलब्ध कराई गई? ऐसे कई सवाल अब जांच के दायरे में हैं।
इसके अलावा, युवक के बयान के अनुसार यदि सितंबर महीने में पहली बार शारीरिक संबंध बना था, तो गर्भधारण का वास्तविक समय क्या था और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी संलिप्तता है? इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो गई है। बच्चे के पितृत्व से जुड़े विवाद की सच्चाई सामने लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत डीएनए जांच कराई जाएगी या नहीं, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
दूसरी ओर, बिना उचित चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक नियमों का पालन किए गर्भपात की दवा बेचे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। संबंधित दवा दुकान के खिलाफ ड्रग्स कंट्रोल विभाग और पुलिस क्या कार्रवाई करते हैं, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
मामले के सभी पहलुओं की जांच के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। हालांकि, नाबालिग छात्रा की सुरक्षा में लापरवाही, गर्भपात की दवा की आपूर्ति और नवजात की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
फिलहाल, क्षेत्र में नाबालिग छात्रा को न्याय दिलाने और मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग उठ रही है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, स्टेट हेड।
