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इकौना श्रावस्ती, बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में वर्षावास पूजा के दौरान बौद्ध भिक्षु संघ ने गंध कुटी तथा जेतवन में स्थित बौद्ध कालीन कुआ का पूजा अर्चना किया ।

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इकौना श्रावस्ती,

बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में वर्षावास पूजा के दौरान बौद्ध भिक्षु संघ ने गंध कुटी तथा जेतवन में स्थित बौद्ध कालीन कुआ का पूजा अर्चना किया ।

 

 

 

 

इस दौरान बौद्ध भिक्षु आनंद सागर में कहा की भगवान बुद्ध कहते थे इस संसार में वैर से वैर  कभी शांत नहीं होता है , अवैर से ही वैर शांत होता है – यही शाश्वत  नियम है |माता-पिता, न दूसरे  रिश्तेदार, उतना कुशल नहीं कर सकते है, जितना कुशल सन्मार्ग की ओर गया हुआ चित्त करता है |

 

 

 

जिसप्रकार फूलों के ढेर से बहुत सारी मालायें बनाई जाती है , उसीप्रकार मनुष्यों को बहुत से कुशल कर्म करने चाहिये |चन्दन ,तगर, कमल या जूही, इन  सभी की सुगंधियों से सदाचार की सुगंध श्रेष्ठ है |उस कार्य का करना अच्छा है, जिसे  करने के  पश्चात पछताना न पड़े और जिसका फल प्रसन्न मन से भोगना पड़े |बुरे मित्रों की  संगति न करे  और अधम पुरुषों की  संगति  न  करे |  अच्छे मित्रों की संगति  करे  और  उत्तम पुरुषों की संगति करे |निरर्थक-पदों से युक्त  हज़ार  गाथाओं  से  एक ही गाथा श्रेष्ट है, जिसे  सुनकर  शान्ति प्राप्त हो |यदि पुण्य कर्म  करे, तो उसे बार-बार  करे |  उसमें  रत होवे |क्योंकि  पुण्य  का  संचय  सुखकारक होता है | मनुष्य अपना स्वामी स्वयं है, दूसरा  कौन स्वामी हो सकता है ? स्वयं को दमन  करने वाला  मनुष्य  दुर्लभ स्वामित्व को  पाता है | क्रोध को अक्रोध से जीते, बुराई  को  भलाई  से  जीते, कंजूस को दान से  और  झूठ को सत्य से  जीते।  पूजन के उपरांत बौद्ध भिछू सघ ने जेतवन परिसर  का भ्रमण कर के एतिहासिक जानकारी प्राप्त किया।

शिवा जायसवाल
जिला संवाददाता श्रावस्ती।

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