विद्या शंकर ठाकुर, ब्यूरो चीफ, सुपौल बिहार, इंडियन टीवी न्यूज़
*बेरोज़गारी एक राष्ट्रीय आपदा, बिहार इसका केंद्र: अनुपम*

राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम और सहयात्रियों की प्रदेशव्यापी ‘हल्ला बोल यात्रा’ के समापन पर पटना में आज एक ऐतिहासिक युवा सम्मेलन हुआ।
‘आत्महत्या नहीं, आंदोलन होगा’ के नारों की गूँज के साथ पटना के ‘युवा सम्मेलन’ में आज बेरोज़गारी के खिलाफ आंदोलन की राह तय की गयी।
प्रदेशव्यापी ‘हल्ला बोल यात्रा’ के समापन पर हुए समागम में आज असीम ऊर्जा और संकल्प दिखा।

समागम की विधिवत शुरुआत प्रोफेसर आनंद कुमार ने दीप प्रज्वलित करके किया। मुख्य वक्ताओं में प्रोफेसर आनंद कुमार के अलावा भूतपूर्व सीआईसी यशोवर्धन झा आज़ाद, नवल किशोर चौधरी, बैंक यूनियन के नेता सुनील कुमार, जेपी सेनानी दिनेश कुमार, पंकज जी, कोचिंग एसोशिएशन के सुधीर सिंह, शिक्षक एसके झा, रमेश चंद्रा समेत कई विशिष्टजनों ने शिरकत किया।
*पटना के युवा सम्मेलन में चार प्रमुख प्रस्ताव पास हुए जिनपर जल्द ही ठोस एक्शन शुरू होगा:*
1) सरकारी भर्तियों में हो रही देरी, भ्रष्टाचार, अनियमितता को दूर करने के लिए समन्वय समिति का गठन किया गया। यह समिति मुख्य रूप से भर्ती समूहों के बीच एकजुटता बनाने की कोशिश करेगी ताकि ‘मॉडल एग्जाम कोड’ लागू हो सके। समयबद्ध और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के लिए समूहों के बीच समन्वय स्थापित करके व्यापक एकता बनायी जाएगी।
2) बिहार में ठप पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए आयोग का गठन किया जाएगा। चीनी मिल, पेपर मिल, जूट मिलों के जरिए कृषि और रोज़गार की असीम संभावनाओं को तलाशा जाएगा। आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने के लिए आंदोलन से लेकर अदालत तक का रास्ता अपनाया जाएगा।
3) बेरोज़गारी के कारण निराश युवाओं में बढ़ रही आत्महत्या पर रोक लगाने के लिए हर जिले में काउंसिलिंग सेंटर का गठन हो। साथ ही आत्महत्या के हर मामले पर संबंधित जिलाधिकारी मीडिया के समक्ष अपनी रिपोर्ट रखे।
4) यात्रा के दौरान जिस ‘भारत रोज़गार संहिता’ के प्रस्ताव को व्यापक जनसमर्थन मिला, उसको लेकर चलेगा अभियान। सरकार से भरोसा मांगते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जाएगा। अभियान की सम्पूर्ण रूपरेखा दशहरा के बाद रखी जायेगी।
बेरोज़गारी जीवन मरण का सवाल बन चुका है। युवा वर्ग अपना भविष्य अंधकार में देखकर हताश है। भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। लेकिन युवा देश में युवाओं की आत्महत्या आम बात होती जा रही है। यह देश का सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए था। संसद में इसपर बहस होनी चाहिए थी। टीवी अखबारों में सवाल जवाब होना चाहिए था। लेकिन सच्चाई ठीक इसके उलट है। युवाओं की पीड़ा को विमर्श से ही गायब कर दिया गया है। इन्हीं कारणों से युवाओं में भारी असंतोष है जो आक्रोश का रूप लेकर समय समय पर फूटता है। बेरोज़गारी एक राष्ट्रीय आपदा बन चुकी है और बिहार इसका केंद्र है।
*सरकार से चाहिए भ-रो-सा*
आज ज़रूरत है कि युवाओं को हताशा से निकाल कर उम्मीद की किरण दी जाए। देश को निराशा से समाधान की तरफ ले जाया जाए। बेहतर भविष्य और रोज़गार के लिए सरकार से भरोसा चाहिए। यह भरोसा है ‘भारत रोज़गार संहिता’ जो बेरोज़गारी के खिलाफ शुरुआती कदम हो सकते हैं। ‘भारत रोजगार संहिता’ के तीन मुख्य बिंदु हैं:
*1) सरकारी भर्तियों में ‘मॉडल एग्जाम कोड’ लागू करके 9 महीने में विज्ञापन से नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करो*
• रिक्त पड़े सभी सरकारी पदों को तुरंत भरो
• पेपर लीक, धांधली या देरी जैसे मामलों में स्पष्ट जवाबदेही तय हो
• मॉडल कोड का पालन न होने पर अभ्यर्थियों को मुआवजा मिले
*2) हर नागरिक को रोजगार की गारंटी हो*
• न्यूनतम आय पर काम करने को तैयार हर वयस्क को उनके घर के नजदीक रोजगार दो
• इससे अर्थव्यवस्था में सुधार होगी और करोड़ों परिवार गरीबी से बाहर आएंगे
*3) देश की संपत्तियों को बेचकर बड़े धन्नासेठों को फायदा देना बंद हो*
• स्कूल अस्पताल को गरीबों की पहुँच से बाहर करने वाली नीतियां बंद करो
• सरकारी बैंक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इन्हें बेचने की बजाए स्वायत्तता दो
• रेलवे को बेचने की बजाए खाली पदों पर जल्द भर्ती करो
• सेना विरोधी ‘अग्निपथ’ स्कीम वापिस लो और नियमित नौकरियों में ठेका प्रथा बंद करो
‘भारत रोज़गार संहिता’ को लागू करवाने का एक ही तरीका है कि देश के नागरिक एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें। एक सकारात्मक आंदोलन हो जो सरकारों को मजबूर करे रोज़गार पर ठोस कदम उठाने के लिए। जैसी परिस्थिति है उसे देखकर लगता है कि साल भर के अंदर स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा आंदोलन हो सकता है। एक बार फिर देश को दिशा दिखाने का काम बिहार से होगा।
*देशव्यापी आंदोलन की ज़मीन तैयार करने के लिए बिहार में हुई ‘हल्ला बोल यात्रा’*
इसी आंदोलन की ज़मीन तैयार करने लिए अनुपम के नेतृत्व में 16 अगस्त से ‘हल्ला बोल यात्रा’ निकाली गयी। चंपारण से शुरू कर पूरे बिहार की यात्रा की गयी जिसका समापन 25 सितंबर को पटना में युवा सम्मेलन के साथ हुआ। यात्रा के दौरान ‘भारत रोज़गार संहिता’ के प्रस्ताव पर व्यापक जनसंवाद हुआ। हर वर्ग का खूब समर्थन मिला, विशेष तौर पर युवाओं और बुद्धिजीवियों का। यह महसूस किया गया कि आम लोग बहुत पीड़ा में हैं। महँगाई बेरोज़गारी के कारण अत्यंत परेशान हैं। आज हम पटना के ‘युवा सम्मेलन’ में प्रण लेते हैं कि अपने देशवासियों को इस पीड़ा से बाहर निकालेंगे। इसके लिए ‘युवा हल्ला बोल’ आंदोलन को मजबूती देंगे।
*बदलेगा हवा, देश का युवा*
देश में आज डर का माहौल बनाया जा रहा है। फिल्मकार डरे हुए हैं कि अगर सरकर पर कोई टिप्पणी कर दी तो अगली फिल्म रिलीज नहीं होगी। उद्योगपति डरे हैं कि सत्ताधारी पार्टी की आलोचना कर दी तो धंधा नहीं कर पाएंगे। मीडियाकर्मी डरे हैं कि सवाल पूछ दिया तो चैनल से छुट्टी हो जाएगी और यूट्यूब तक सीमित रह जाएंगे। नौकरी करने वाले डरे हैं कि कुछ बोला तो प्रोमोशन रुक जाएगा। हर कोई जो डरा है उसके पास कुछ न कुछ खोने को है। जबकि बेरोज़गार युवाओं के पास खोने को कुछ है ही नहीं और पाने को सब कुछ है। पूरा भविष्य दांव पर लगा है। इसलिए युवाओं को तो किसी से डरना ही नहीं चाहिए। देश के जो आज हालात हैं, उन्हें सुधारने का काम युवा वर्ग ही करेगा। यही कारण है कि आंदोलन में ‘बदलेगा हवा, देश का युवा’ का नारा दिया गया है।
इन्हीं अहम फैसलों के साथ देश में व्यापक युवा आंदोलन खड़ा करने का आज संकल्प लिया गया। ‘युवा सम्मेलन’ में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में नारा लगाया कि “आत्महत्या नहीं, अब आंदोलन होगा!”