मऊ। जिले के विभिन्न विकास खंड क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों और डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे अब तक लगभग 57 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। लेकिन अभी तक उनके वेतन से वसूली नहीं की जा सकी है। शिक्षा सत्र शुरू होने के तीसरे दिन घोसी विकास खंड क्षेत्र के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में तैनात शिक्षक को फर्जी विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री मिलने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बर्खास्त कर दिया है। साथ ही बीएसए ने विद्यालय के प्रबंधक को शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
प्राप्त सुचना के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से जिले के विभिन्न विकास खंड क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले 57 शिक्षकों की बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से बर्खास्त किया जा चुका है। संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराया जा चुका है। शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बर्खास्त शिक्षकों की ओर से लिए गए वेतन को जमा करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन किसी ने अभी तक जमा नहीं किया है। विभाग की तरफ से नोटिस तो जारी की गई। लेकिन शिक्षकों के कोर्ट में चले जाने से मामला लंबित है। शिक्षा सत्र के तीसरे दिन गत बुधवार को घोसी विकास खंड क्षेत्र के हाजीपुर स्थित स्वाधीनता रजत जयंती स्मारक उच्च प्राथमिक विद्यालय को वर्ष 2006 में अनुदानित किया गया। इसमें पूर्व से ही नियुक्त सहायक अध्यापक राजेंद्र चौहान की बीएड डिग्री फर्जी होने की शिकायत की गई थी। जांच में शिक्षक ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा बिहार से बीएड किया था। जबकि विश्वविद्यालय को यूजीसी की तरफ से वर्ष मई 1999, वर्ष मई 2000, वर्ष मई 2001, अप्रैल 2018 सहित कई बार अधिसूचना प्रकाशित कर फर्जी घोषित किया गया है। ऐसे में विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्री भी फर्जी होगी। इसी के आधार पर बीएसए ने विद्यालय के प्रबंधक को सहायक अध्यापक राजेंद्र चौहान की सेवा समाप्त करते हुए एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इस बाबत बीएसए संतोष कुमार उपाध्याय का कहना है कि फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक को बर्खास्त कर दिया गया है। विद्यालय प्रबंधक को शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।