नरेश सोनी Indian TV News हजारीबाग संवाददाता
धड़ल्ले से दारू प्रखंड के पुनाई पंचायत के ग्राम बसरिया रा॰ उ॰ म॰ विद्यालय में डीएमएफटी मद से थर्ड क्लास मटेरियल उपयोग कर19 लाख का रसोइया सेट बनाया जा रहा है ।
कूप खोदकर निकाली गई रेत से किया जा रहा जोड़ाई और ढलाई। धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा थर्ड क्लास सरिया और सिमेंट
कार्यस्थल पर कोई बोर्ड नहीं लगा जिस पर कार्य की रूपरेखा को दर्शाता हो और ईस्टीमीट को दर्शाता हो कौन सा मत से किया जा रहा कार्य उसका नाम को दर्शाता हो
ध्वजा-तोलन के जगह रसोइया शेड का निर्माण कराया जा रहा है
ग्रामीणों के रोकने बावजूद कार्य रोका नहीं जा रहा स्कूल का कुल भूमि 93 डीसमील से घटकर 40 से 50 डीसमील रह गया है पहले स्कूल का भूमि निकासी हो फिर बने रसोईया- ग्रामीण
स्कूल के भूमि को लोगों ने बपौती समझ लिया जो कि आमगरमजरूआ जमीन है और स्कूल के लिये है।
दारू प्रखंड के पुनाई पंचायत अंतर्गत रा॰उ॰ मध्य विद्यालय बसरिया में अनुमानुसार DMFT मद से रसोईया शेड का निर्माण हो रहा है जिसकी स्वीकृति राशि 19 लाख रुपए बताई जा रही है बताते चले स्कूल में जो रसोईया शेड निर्माण हो रहा है । उसकी रूप-रेखा स्थल पर नहीं लगा है , इसे ठेकेदार द्वारा गोपनीय तरीके से बनाने की कोशिश किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मिलकर मना किया पर कार्य को रोका नहीं गया बताते चले स्कूल की कुल भूमि 93 डेसिमल बताया गया है जबकि स्थल पर स्कूल की कुल भूमि लगभग 40 से 50 डेसिमल बचा हुआ है आमगरमजरूआ भूमि को कुछ लोगों ने अपना पैतरीक सम्पत्ति समझ कर स्कूल को सीमित अवस्था में कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले स्कूल की भूमि की निकासी किया जाए फिर रसोईया शेड निर्माण कराया जाए पर ग्रामीणों का कोई सुनने वाला नहीं बताना चाहूंगा जिस स्थान पर स्कूल का झंडा तोलन किया जाता है उसी स्थान पर घटिया तरह का मटेरियल का उपयोग कर रसोइया सेट निर्माण कराया जा रहा है। उधर पूर्व में स्कूल के भूमि में ही आंगनबाड़ी निर्माण कराया गया है आंगनबाड़ी और स्कूल के बिल्डिंग के बिच में कुछ हिस्सा भूमि खाली था जिस पर रसोईया शेड बनना उचित था । परंतु स्कूल के भुमी से सटे भूमि के मालिक ने स्कूल के बीचो-बीच से रास्ता को लेकर विवाद खड़ा कर दिया जिससे फाउंडेशन कटा का कटा रह गया और दूसरा फाउंडेशन स्कूल के झंडा तोलन के स्थान पर रसोईया शेड निर्माण कराया जा रहा है जो बहुत ही गलत है जिससे बच्चों को झंडा तोलन खेल-कूद ,प्रोग्राम ,प्रार्थना आदि मैं प्रॉब्लम जगह को लेकर होगा। ग्रामीणों का कहना है पहले स्कूल की भूमि का निकासी किया जाए फलास्वरूप रसोईया शेड का निर्माण कराया जाए ग्रामीणों ने आवाज उठाया कि इसे रोका जाए जब तक की भूमि का निकासी नहीं हो जाता।
प्राइमरी शिक्षक न होने से राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बसरिया बंद होने के कगार पर
बताते चलें आज से 10 साल पहले स्कूल की शिक्षा व्यवस्था बहुत ही अच्छा था परंतु 10 साल बाद प्राइमरी टीचर ना होने के कारण सहायक टीचर/पारा टीचर स्थानीय टीचर होने के वजह से शिक्षा में बहुत ही लचीला पन्ना देखने को मिला जिससे ढाई सौ विद्यार्थियों से घटकर 80 से 100 के बीच में सिमट गया आने वाला समय में यह स्कूल की व्यवस्था इसी तरह से रही और प्राइमरी टीचर की उपस्थित यहां नहीं रही तो इसे बंद होने में देर नहीं लगेगा ग्रामीणों का कहना है कि सरकार इस पर ध्यान आकर्षित करें सरकार अगर गरीबों को कुछ देना चाहते हैं तो छोटे-छोटे बच्चों को शिक्षा दें आजकल खाने को तो होता नहीं महंगाई के कारण प्राइवेट स्कूलों में कैसे पढ़ा सकेंगे इसलिए हम सब ग्रामीण सरकार से निवेदन करते हैं और जिला शिक्षा परियोजना से भी निवेदन करते हैं की एक प्राइमरी टीचर राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बसरिया में बहाल किया जाए जिससे यहां की और यहां के लोगों के बच्चों की भविष्य शिक्षा की ओर आगे बढ़े।