ब्यूरो चीफ मनोज भट् जिला बस्तर छत्तीसगढ़
जगदलपुर|कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो छोटे गांवों की बेटियां भी अपनी तकदीर खुद लिख सकती हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की गूँज इस बार ग्राम तीरथगढ़ की अनीता कश्यप की सफलता के साथ सुनाई दे रही है। ‘बिहान’ योजना के उद्यमी मॉडल ने अनीता जैसी साधारण पृष्ठभूमि की युवती को आज एक सफल ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित कर दिया है।
अनीता का सफर चुनौतियों से भरा था। उनके पिता परदेशी राम के पास महज 3 एकड़ खेती की जमीन थी, जिसमें पारंपरिक तरीके से सिर्फ एक फसली खेती होती थी। परिवार की आय इतनी कम थी कि अनीता को सहयोग के लिए अपनी बड़ी बहन के घर आश्रय लेना पड़ा। लेकिन साल 2022 में लाल हजारी स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। यहाँ से अनीता को न केवल आत्मविश्वास मिला, बल्कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर परियोजना के माध्यम से एकीकृत खेती के वैज्ञानिक तरीके और इसके आर्थिक फायदों की समझ भी विकसित हुई। पूँजी की कमी को दूर करने के लिए अनीता को योजनाबद्ध तरीके से वित्तीय सहयोग मिला। शुरुआत में चार हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड और दस हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि मिली, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से आगे बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने साठ हजार रुपये का बैंक लोन और इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर परियोजना के तहत एक लाख पचास हजार रुपये का उद्यमी लोन प्राप्त किया। इन संसाधनों का सही इस्तेमाल करते हुए अनीता ने सब्जी उत्पादन, मुर्गीपालन और ब्रीडिंग यूनिट को एक साथ शुरू किया। आज परिणाम सबके सामने हैं। अनीता ने सब्जी उत्पादन से एक लाख पैंसठ हजार रुपये, मुर्गी पालन से दो लाख पचपन हजार रुपये और ब्रीडिंग यूनिट से पैंसठ हजार रुपये की शानदार कमाई की है। उन्होंने लगभग 5 लाख रुपये के करीब का टर्नओवर हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि बस्तर की महिलाएं अब सिर्फ श्रमिक नहीं, बल्कि कुशल उद्यमी बन रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में अनीता कश्यप की यह कहानी महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है, जो बताती है कि सही सरकारी योजनाओं और मजबूत इच्छाशक्ति के मेल से ग्रामीण भारत की तस्वीर कैसे बदली जा सकती है।