यमुनानगर बना कचरा नगरी
दीपावली के बाद से ही अधिकांश वार्ड कचरे के ढेर से अटे,मुख्य चौकों के हालात और भी बिगड़े।
प्रापर्टी टैक्स, डिवैल्पमैन्ट चार्ज, रोड टैक्स इन्कम टैक्स जैसे नाना प्रकार के टैक्स वसूलने के बाद भी शहर की जनता को गन्दगी में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
उद्योग व्यापार मंडल के प्रधान महेन्द्र मित्तल ने कहा कि अब जनता शहर के स्मार्ट सिटी बनने के सपने लेना छोड़ दे!
एक ओर जहां छठ पर्व पर सफाई अभियान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहें हैं, दूसरी तरफ निगम की कारगुजारी कुछ और ही ब्यान कर रही है।
और कहीं नहीं, शहर के पाश ईलाकों में ही गंदगी की भरमार है , निगम कर्मचारी और टिप्पर चालक नियमित तौर पर नहीं आते।
निवर्तमान पार्षदों ने बताया कि अधिकांश एकल दम्पत्ति कामकाजी होने की वजह से भोर होते ही घर से निकल जातें हैं।
और शाम के समय ही घर की साफ सफाई कर पाते हैं अंततः उन्हें मजबूरन सांयकाल में ही कचरा घर से बाहर निकालकर फैंकना पड़ता है।
वे लोग कई बार प्रशासन और टिप्पर चालकों से शाम के समय भी कचरा उठाने की मांग कर चुके हैं परन्तु प्रशासनिक आदेश न होने की वजह से भी जिले भर में गंदगी पसरी रहती है।
संवाददाता संदीप गाँधी की यमुनानगर से रिपोर्ट