प्रीतम यादव ब्यूरो चीफ इंडियन टीवी न्यूज़ :—
बूंद-बूंद को तरसते जंगल :— पानी की तलाश में भटके हिरण की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत !
कवर्धा — जिले के ग्राम लेंझाखार में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब पानी की तलाश में जंगल से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंचा एक हिरण नेशनल हाईवे पार करते समय अज्ञात कार की चपेट में आ गया। तेज रफ्तार कार की टक्कर से हिरण की मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सूचना देने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हिरण के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया गया। पोस्टमार्टम के लिए शव भेज दिया गया है।
वन विभाग के एक अधिकारी ने प्रारंभिक जांच में माना कि जंगल में पानी की कमी के चलते हिरण गांव की ओर भटक आया होगा। हालांकि अधिकारी ने पूरी जानकारी देने से परहेज़ करते हुए कहा कि “विस्तृत जानकारी वरिष्ठ अधिकारी ही देंगे।”
हर वर्ष दोहराया जाता है ये मंजर
यह कोई पहली घटना नहीं है। हर वर्ष गर्मी के मौसम में पानी की तलाश में भटके वन्य जीव सड़कों पर आ जाते हैं और वाहनों की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं। खासकर कबीरधाम और आसपास के जंगलों में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
करोड़ों की योजनाएं, फिर भी बूंदभर पानी नहीं
जंगल क्षेत्र में तालाब और डेम निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन जल स्रोतों में गर्मी के मौसम में बूंदभर पानी भी नहीं बचता। इसका सीधा असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है, जो अपने जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत — पानी — की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।
अवैध कटाई और घटते जंगल — संकट में जीवन
जंगलों की अवैध कटाई और अतिक्रमण ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नष्ट कर दिया है। भोजन और पानी के अभाव में ये जीव अब खेतों और सड़कों पर दिखाई देने लगे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
जिम्मेदारी तय हो, तभी थमेगा सिलसिला
वन विभाग द्वारा कार्रवाई तो होती है, लेकिन जब तक पानी की स्थायी व्यवस्था और जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी घटनाएं हर साल होती रहेंगी। यह समय है जब वन प्रबंधन को केवल कागज़ी योजनाओं से आगे बढ़कर जमीन पर असरदार का2म करना होगा।