एनटीपीसी के चट्टी बारियातू कोल खनन परियोजना को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है।
पिछले दिनों हुई हिंसक झड़प और पुलिसिया कार्रवाई के बाद, आज कांग्रेस विधायक दल का एक प्रतिनिधिमंडल मौके पर पहुँचा। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों और रैयतों से मुलाकात कर उनका पक्ष जाना।
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब ग्रामीणों ने एनटीपीसी के अधीन कार्यरत ऋत्विक एमआर पर बिना मुआवजा दिए जबरन जमीन हड़पने और अवैध खनन का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने पूर्व कृषि मंत्री योगेन्द्र साव की एक फैक्ट्री को बिना मुआवजा दिए ध्वस्त कर दिया।
इसी विवाद के बीच, जब ग्रामीणों ने खनन और ट्रांसपोर्टिंग को रोकने की कोशिश की, तो उनकी कोयला ढुलाई कर रहे ड्राइवरों और मालिक से झड़प हो गई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब भारी संख्या में पुलिस बल गाँव में घुस आया और ग्रामीणों के साथ मारपीट की। पुलिस ने छह ग्रामीणों को गिरफ्तार भी किया।
गिरफ्तार किए गए लोगों को इतनी चोटें आईं कि कोर्ट में पेशी के दौरान जज ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया और कई पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया।
इन्हीं घटनाओं के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देश पर एक जांच समिति का गठन किया गया था, जिसने आज गाँव का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने जेल भेजे गए ग्रामीणों के परिवार से भी मुलाकात की और उस 2.2 किमी सड़क का जायजा लिया, जिसे कथित तौर पर बिना मुआवजा दिए रैयती जमीन पर बना दिया गया है।
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि बिना सहमति और मुआवजा दिए जमीन का अधिग्रहण और पुलिसिया बर्बरता स्वीकार नहीं की जाएगी। जांच दल जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद पार्टी इस मामले पर बड़ा आंदोलन शुरू कर सकती है। इस खबर पर हमारी नजर बनी हुई है।
नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज ब्यूरो चीफ हजारीबाग