दुद्धी सोनभद्र। कस्बा वार्ड नंबर 4 निवासी और क्षेत्र के ख्यातिप्राप्त वैदिक आचार्य पंडित श्री बद्रीनाथ तिवारी का 95 वर्ष की आयु में निधन बीते शनिवार की देर रात्रि हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उपचार के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो पाया। शनिवार की देर रात्रि करीब डेढ़ बजे उन्होंने अपने निजी आवास पर अंतिम सांस ली। पंडित बद्रीनाथ तिवारी कस्बे के वरिष्ठतम विद्वानों में गिने जाते थे। उन्हें वेद, ज्योतिष और तंत्रविद्या का गहन ज्ञान प्राप्त था, जिसके कारण दूर-दराज़ से लोग धार्मिक और पारंपरिक परामर्श लेने उनके पास पहुँचते थे। उनके निधन से पूरे कस्बे और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उल्लेखनीय है कि करीब डेढ़ महीने पहले उनकी धर्मपत्नी का भी निधन हो गया था। पति-पत्नी दोनों ने सामाजिक और धार्मिक जीवन में अपने योगदान से लोगों के बीच संस्कार, अध्यात्म और जीवन मूल्यों की अमिट छाप छोड़ी थी। अल्प अवधि में दोनों के आकस्मिक निधन से परिवार और क्षेत्रवासियों को दुगुना आघात पहुँचा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तिवारी जी न केवल सरल और मिलनसार स्वभाव के थे, बल्कि धार्मिक कार्यों में भी सदैव अग्रणी रहते थे। उन्होंने विभिन्न अनुष्ठानों और विद्या प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया।उनके नाती स्वरूप मिश्रा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में पंडित जी का योगदान अनुकरणीय रहा है। उन्होंने अपने जीवन को परिवार ही नहीं, पूरे क्षेत्र के संस्कार और अध्यात्म को समर्पित कर दिया। परिजनों के अनुसार पंडित जी का अंतिम संस्कार आज रविवार पूर्वाह्न कनहर और ठेमा नदी के संगम तट पर किया जाएगा। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में परिजन, सगे-संबंधी और क्षेत्रवासी शामिल होंगे। निधन की खबर सुनते ही उनके आवास पर शोक संवेदना प्रकट करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी है। स्थानीय गणमान्य नागरिकों और धार्मिक संगठनों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।
सोनभद्र, तहसील रिपोर्टर दुद्धी, विवेक सिंह