इंडियन न्यूज़ रिपोर्टर संतोष गोल्हानी सिहोरा लखनादौन
सिवनी: सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के तहत जानकारी न दिए जाने पर एक आवेदक की प्रथम अपील स्वीकार कर ली गई है। यह मामला लखनादौन, जिला सिवनी का है, जहां एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर जानबूझकर जानकारी रोकने का आरोप लगा है।
मामले के अनुसार, अपीलार्थी श्री संतोष गोल्हानी, निवासी सिहोरा ने प्राचार्य, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, लखनादौन से दिनांक 11.04.2025 को एक आवेदन के माध्यम से कुछ दस्तावेज मांगे थे। अधिनियम की धारा 6(1) के तहत दिए गए इस आवेदन पर प्राचार्य ने कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कोई जानकारी उपलब्ध कराई।
इससे परेशान होकर गोल्हानी ने दिनांक 07.07.2025 को RTI अधिनियम की धारा 19(1) के तहत कार्यालय कलेक्टर, जनजातीय कार्य विभाग, सिवनी में पहली अपील दायर की। यह अपील स्वीकार कर ली गई और प्रथम सुनवाई की तारीख 07.07.2025 तय की गई।
सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को बुलाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि अपीलकर्ता संतोष गोल्हानी और प्रतिवादी प्राचार्य दोनों ही तय समय, शाम 3 बजे, पर अनुपस्थित रहे। इस अनुपस्थिति के बावजूद, मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई गई।
अधिकारियों ने अपीलकर्ता के आवेदन की बारीकी से जांच की। पाया गया कि गोल्हानी ने RTI शुल्क और अन्य सभी कानूनी औपचारिकताएं विधिवत पूरी की थीं। उनके आवेदन के साथ 50 रुपये का गैर-न्यायिक स्टाम्प भी लगा था।
यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि प्राचार्य, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, लखनादौन ने इस मामले में न तो कोई जवाब दिया और न ही जानकारी देने का कोई प्रयास किया। इस लापरवाही और अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के कारण उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
प्रकरण की सुनवाई के बाद, अधिकारियों ने सर्वसम्मति से अपीलार्थी की प्रथम अपील को स्वीकार कर लिया। इसके बाद प्राचार्य, शा. उत्कृष्ट वि. लखनादौन को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्हें आदेश दिया गया है कि वे मांगी गई सभी जानकारियां सात दिनों के भीतर अपीलकर्ता संतोष गोल्हानी को उपलब्ध कराएं।
इस फैसले से यह भी उजागर हुआ है कि संबंधित प्राचार्य के पास शायद वे दस्तावेज ही नहीं हैं जो आवेदक ने मांगे थे, या वे जानबूझकर उन्हें छिपा रहे हैं। इसी वजह से वे लंबे समय से जानकारी देने से बच रहे हैं।
एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस मामले से जुड़े एक कर्मचारी, मुकेश श्रीवास्तव, जो अनुकम्पा नियुक्ति पर थे, वे भी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस घटना ने जिले के सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता की कमी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
*RTIभ्रष्टाचार के खिलाफ एक शक्तिशाली हथियार*
लोक सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर अब कड़ा रुख अपनाया जा रहा है। लखनादौन, सिवनी के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य द्वारा आवेदक श्री संतोष गोल्हानी को जानबूझकर जानकारी न देना इसी का एक उदाहरण है। इस मामले में, यह भी उजागर हुआ है कि एक कर्मचारी, मुकेश श्रीवास्तव, जो अनुकंपा नियुक्ति पर कार्यरत थे, वे भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह तथ्य इस ओर इशारा करता है कि मांगी गई जानकारी में मुकेश श्रीवास्तव की नियुक्ति या सेवा से संबंधित कुछ ऐसा हो सकता है, जिसे अधिकारी छिपाना चाहते थे। यह घटना दर्शाती है कि अधिकारी अक्सर अपने और अपने मातहत कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए सूचना के अधिकार का गला घोंटने की कोशिश करते हैं। यह मामला उन सभी अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो सोचते हैं कि वे कानून से ऊपर हैं।