जनता की वोट लेकर क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का मौन धारण
सिवनी // भाजपा शासनकाल में सिवनी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से तितर-बितर होती नजर आ रही है। जिला मुख्यालय से लेकर आदिवासी अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली की मार झेल रही हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीण इलाकों में बने उप स्वास्थ्य केंद्र महज़ नाम के लिए संचालित हो रहे हैं।
सबसे बड़ी तस्वीर केदारपुर उप स्वास्थ्य केंद्र की है, जो लंबे समय से स्टाफ विहीन चल रहा है। न डॉक्टर, न नर्स और न ही फार्मासिस्ट मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी कोई गंभीर बीमार पड़ता है, तो उन्हें 30 से 40 किलोमीटर दूर सिवनी या घंसौर जैसे कस्बों में इलाज कराने जाना पड़ता है। यहां तक की मरीज की जान बचाने के लिए लोगों को जबलपुर नागपुर एवं पड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में भागना पड़ रहा है,कई बार देर से उपचार मिलने के कारण मरीजों की जान तक चली जाती है।
क्षेत्रीय झोलाछाप डॉक्टर संभाल रहे जनता का इलाज
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग की नाकामी की जानकारी बार-बार सीएमएचओ को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सिवनी सीएमएचओ जयपाल सिंह ठाकुर को ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, फिर भी केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है।
जनता का गुस्सा अब उनके चुने हुए प्रतिनिधियों पर भी फूट रहा है। आरोप है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता अब आंखें मूंदकर बैठे हैं। आदिवासी बहुल्य इलाकों के विकास और स्वास्थ्य सुविधा के बड़े-बड़े वादे चुनावी मंचों पर किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई सुधार नहीं हुआ।
सत्ता के गलियारे से झूठे वादे जमीनी हकीकत खाली
केदारपुर और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति रही तो अगली बार वे नेताओं से सवाल जरूर करेंगे। लगातार ठप स्वास्थ्य व्यवस्था से गरीब और आदिवासी जनता सबसे अधिक प्रभावित है। यह हाल सिर्फ केदारपुर का नहीं है, बल्कि पूरे जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों में यही तस्वीर है। भाजपा शासनकाल में जिस “स्वस्थ मध्यप्रदेश” के सपने दिखाए गए थे, वह सिवनी जिले में हकीकत से कोसों दूर है। जनता अब बदलाव की उम्मीद लगाए बैठी है।
जनता का टैक्स और जनता को ही चूना शासन की नीति
जब शासन कई प्रकार की नीतियों से जनता का खून चूस कर तरह-तरह के टैक्स लगाकर-टैक्स वसूल किया जाता है जिससे जनता हितार्थ के कार्य किया जा सके तो फिर स्वास्थ्य सुविधा जैसी नीतियों से आम जनता को क्यों वंचित रखा जा रहा है स्थानांतरण और अटैचमेंट में मिली भगत का खेल क्यों-क्यों ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधा को बत्तर किया जा रहा है सिवनी जिले में बैठे अधिकारी जिले की आखिरी सीमा में सौतेला व्यवहार दिखाते नजर आ रहे हैं!